केपटाउन में रवींद्रनाथ महतो ने रखा भारत का पक्ष, बोले- दिव्यांगजनों के लिए सुलभता दान नहीं, लोकतांत्रिक अधिकार

झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने केपटाउन में कॉमनवेल्थ संसदीय कार्यशाला में दिव्यांगजनों के अधिकारों पर भारत का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि सुलभता कोई दान नहीं, बल्कि एक मुख्य लोकतांत्रिक अधिकार है, जो 16% वैश्विक आबादी के लिए महत्वपूर्ण है.

रांची. दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में आयोजित 69वें कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन की कार्यशाला में झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने बतौर वक्ता भारत का पक्ष रखा. "सुलभ संसद : दिव्यांगजनों के लिए समावेश" विषय पर आयोजित कार्यशाला में उन्होंने कहा कि सुलभता कोई दान नहीं, बल्कि मुख्यधारा का लोकतांत्रिक अधिकार है.

दुनिया की 16 फीसदी आबादी दिव्यांगता से प्रभावित

रवींद्रनाथ महतो ने वैश्विक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया की करीब 16 फीसदी आबादी यानी लगभग 1.3 अरब लोग किसी न किसी रूप में गंभीर विकलांगता का अनुभव करते हैं. उन्होंने बताया कि भारत का आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम-2016 कुल 21 प्रकार की विकलांगताओं को मान्यता देता है. कानून के तहत दिव्यांगजनों के लिए शिक्षा, रोजगार, गैर-भेदभाव और भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रावधान है.

1.34 करोड़ से अधिक यूनिक डिसएबिलिटी आइडी कार्ड जारी

स्पीकर ने भारत में दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए किये गये सुधारों का जिक्र करते हुए बताया कि मार्च 2026 तक देशभर में 1.34 करोड़ से अधिक यूनिक डिसएबिलिटी आइडी कार्ड जारी किये जा चुके हैं. इससे दिव्यांगजनों को प्रमाणन और विभिन्न योजनाओं का लाभ पोर्टेबल तरीके से मिल रहा है.

झारखंड में होम वोटिंग का दिया उदाहरण

रवींद्रनाथ महतो ने 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य में बेंचमार्क दिव्यांगता वाले योग्य मतदाताओं के लिए होम वोटिंग की सुविधा उपलब्ध करायी गयी थी. इस दौरान व्हीलचेयर, स्वयंसेवक और परिवहन सहायता जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध करायी गयीं.

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों का हवाला देते हुए डिजिटल पहुंच को अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार का अभिन्न अंग बताया. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को दिव्यांगजनों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पहुंच और समावेश को अपनी कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाना होगा.

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By Manoj Kumar Singh

मनोज सिंह प्रभात खबर में बतौर मुख्य संवाददाता कार्यरत है. पत्रकारिता में उनका 26 साल का अनुभव है. दैनिक हिन्दुस्तान में करीब आठ साल काम करने के बाद वह प्रभात खबर से जुड़े हैं. कृषि, पशुपालन, सहकारिता, वन, जलवायु परिवर्तन, आजीविका, मनोरोग, कोयला संबंधी खबरों में वर्षों काम करने का अनुभव है.

आइआइटी कानपुर से जस्ट ट्रांजिशन विषय पर फेलोशिप प्राप्त करने वाले देश के पहले संवाददाता है. उनको दो बार एग्रई जर्निलिज्म अवार्ड मिल चुका है. झारखंड सरकार के वन विभाग से तिलका मांझी अवार्ड मिला है. कई मचों पर वह प्रभात खबर का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में हिस्सा ले चुके हैं.


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