रांची : सोशल ऑडिट की प्रक्रिया जारी रखी जाये

कई संगठनों ने की मांग, मंत्री से मिलेंगे रांची : झारखंड के कई सामाजिक संगठनों ने मनरेगा में सोशल अॉडिट की प्रक्रिया को यथावत जारी रखने की मांग की है. संगठन के सदस्यों का कहना है कि यदि सरकार को सामाजिक अंकेक्षण से संबंधित शिकायतें मिली है, तो उसकी भी गंभीरता से जांच की जाये, […]

कई संगठनों ने की मांग, मंत्री से मिलेंगे
रांची : झारखंड के कई सामाजिक संगठनों ने मनरेगा में सोशल अॉडिट की प्रक्रिया को यथावत जारी रखने की मांग की है. संगठन के सदस्यों का कहना है कि यदि सरकार को सामाजिक अंकेक्षण से संबंधित शिकायतें मिली है, तो उसकी भी गंभीरता से जांच की जाये, लेकिन यह भी जरूरी है कि अभी यह प्रक्रिया चालू रहे. संगठनों का कहना है कि इस मुद्दे पर उच्चाधिकारियों से मिल कर मांग रखी जायेगी.
जल्द ही विभागीय मंत्री से भी मुलाकात की जायेगी. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारियों से भी वार्ता व पत्राचार की जायेगी. संगठनों का कहना है कि तीन वर्षों के दौरान मनरेगा सहित कुल 16 योजनाअों का अॉडिट किया जा चुका है. सामाजिक कार्यकर्ता बलराम, झारखंड नरेगा वाच के जेम्स हेरेंज, अशर्फी नंद प्रसाद, काशीनाथ चटर्जी, विश्वनाथ सिंह, फादर जॉर्ज, मिथिलेश कुमार, राकेश रौशन किरो आदि ने उक्त मांगें रखी हैं.
अंकेक्षण में भ्रष्टाचार के मामले आ रहे हैं सामने
संगठनों ने विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि सत्ताधारी दल के चार विधायकों ने मनरेगा योजनाअों के सामाजिक अंकेक्षण पर रोक लगाने के लिए उपायुक्तों को पत्र लिखा है. संगठनों का कहना है कि सामाजिक अंकेक्षण से मनरेगा योजनाअों में भ्रष्टाचार के कारनामे सामने आ रहे हैं.
उन्होंने लिखा है कि प्रशासनिक विफलता के कारण कई मामलों में स्थानीय ठेकेदार व कंप्यूटर ऑपरेटर मिल कर फर्जी बिल वाउचर की एमआइएस, करा कर सामग्री मद की राशि की निकासी कर लेते हैं. इस कड़ी में लातेहार में वर्ष 2016 में बीडीओ को करीब 3.75 करोड़ गबन का दोषी पाया गया था. वर्ष 2016-17 में ही मनिका में भी गड़बड़ी के मामले सामने आये थे. इन गड़बड़ियों पर ग्राम सभा, ग्राम पंचायतों, रोजगार सेवक व मुखिया को जवाब देने पड़ रहे हैं. सामाजिक अंकेक्षण जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करता है.

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