रांची : डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) में बुधवार को सिंडिकेट की चौथी बैठक हुई. इसमें फैसला लिया गया कि थर्ड और फोर्थ ग्रेड के कर्मचारियों को एसीपी और एमएसीपी का लाभ के लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा. विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि आंतरिक संसाधन से कर्मचारियों को एसीपी व एमएसीपी का लाभ देना मुश्किल है. क्योंकि, इस पर प्रतिमाह लगभग 22 लाख रुपये खर्च आयेगा.
कुलपति डॉ एसएन मुंडा की अध्यक्षता में हुई सिंडिकेट की बैठक में चर्चा के बाद एसीपी व एमएसीपी का लाभ देने से संबंधित प्रस्ताव को स्थगित रखा गया है.
कुलपति डॉ मुंडा ने बताया कि सरकार के सहयोग से ही एसीपी-एमएसीपी का लाभ दिया जा सकता है. इससे संबंधित प्रस्ताव को पिछले सिंडिकेट से पास कर सरकार के पास भेजा गया है, जिसका जवाब अभी तक नहीं मिला है.
सरकार से राशि मिलने के बाद भी कर्मचारियों को एसीपी-एमएसीपी का लाभ दिया जा सकता है. बैठक में कुलपति के अलावा डीएसडब्ल्यू डॉ नमिता सिंह, डॉ विश्वरूप मुखर्जी, डॉ एनडी गोस्वामी, डॉ एके चौधरी, डॉ मो अयूब, डॉ आरके झा, डॉ धन्नंजय बासुदेव द्विवेदी समेत अन्य सदस्य मौजूद थे.
वीसी व प्रो वीसी को एक्सटेंशन देने का प्रस्ताव: कुलपति व प्रति कुलपति का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें एक्सटेंशन देने से संबंधित परिनियम पर भी चर्चा हुई. इसके लिए झारखंड विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन किया जायेगा. इससे संबंधित प्रस्ताव को सिंडिकेट ने स्वीकृति प्रदान कर दी. इसके बाद एक्ट में संशोधन के लिए सरकार के पास प्रस्ताव भेजा जायेगा, ताकि उसे विधानसभा में पास कराया जा सके.
स्नातक की जगह इंटर स्तरीय होगी परीक्षा
कर्मचारियों की नियुक्ति से संबंधित नियमावली को सिंडिकेट सदस्यों ने चर्चा के बाद स्वीकृति प्रदान कर दी. रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन अधिक रहने पर पीटी और मुख्य परीक्षा होगी. वहीं आवेदन कम रहने पर सिर्फ मुख्य परीक्षा आयोजित की जायेगी. सदस्यों ने कहा कि एलडीसी स्तर की नियुक्ति है. इसलिए सिंडिकेट ने परीक्षा में प्रश्न स्नातक स्तरीय की जगह इंटर स्तरीय करने का सुझाव दिया है.
