रांची : जनजातीय स्वास्थ्य के मुद्दे पर बनी केंद्र सरकार की विशेष कमेटी ने जनजातीय इलाके में सहिया को मिल सकनेवाला 50 फीसदी मानदेय फिक्स कर देने की अनुशंसा की है. वहीं शेष 50 फीसदी भुगतान उनके प्रदर्शन के आधार पर करने का सुझाव दिया है. जनजातीय इलाके में तथा जनजातीय लोगों के बीच बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा स्वास्थ्य संबंधी मौजूदा स्थिति में सुधार के लिए की गयी विभिन्न अनुशंसाअों में से यह भी एक अनुशंसा है, जिस पर अमल किया जाना है.
विशेष कमेटी की रिपोर्ट तो झारखंड सरकार को उपलब्ध करा दी गयी है. पर केंद्र सरकार ने सहिया के निर्धारित मानदेय के संबंध में अभी कोई निर्देश जारी नहीं किया है. निर्देश मिलने के बाद इस संबंध में फंड के लिए प्रस्ताव तैयार किया जायेगा. दरअसल जनजातीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों व संरचना निर्माण पर होनेवाला खर्च स्वास्थ्य मंत्रालय तथा जनजातीय कल्याण मंत्रालय को अपने संयुक्त फंड से वहन करना है. गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत महिला स्वास्थ्य कर्मियों (सहिया) की नियुक्ति की गयी है. सहियाओं पर ही गांव-समाज में स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार सहित लाभुकों तक इनका लाभ मरीजों को दिलाने की जिम्मेवारी है. राज्य में कुल 40964 सहिया हैं.
हर माह दो हजार िमल जाते हैं एक सहिया को
अभी मरीजों तक स्वास्थ्य कार्यक्रमों का लाभ लाभुकों को पहुंचाने के लिए सहिया को प्रोत्साहन राशि दी जाती है. यह राशि प्रदर्शन आधारित होने से हर माह कम-ज्यादा होती है. पर सामुदायिक बैठक करने व रजिस्टर तैयार करने सहित अन्य रूटीन काम से एक सहिया को प्रति माह करीब दो हजार रुपये मिल जाते हैं. रिपोर्ट में लगभग यही भुगतान फिक्स कर देने का सुझाव दिया गया है.
