रांची : स्कूलों में आठ माह से योजना बाधित, 11.5 लाख बच्चियों को नहीं मिल रहा सेनेटरी नैपकिन

संजय रांची : सरकारी स्कूलों की बच्चियों को आठ महीने से सेनेटरी नैपकिन नहीं मिल रहा है. स्कूली बालिकाअों के बीच स्वच्छता को बढ़ावा देने और ड्रॉप आउट रोकने के लिए यह कार्यक्रम शुरू तो किया गया, लेकिन नैपकिन की खरीद नहीं होने के कारण फिलहाल यह बंद है. पहले केंद्र ने स्कूली स्वच्छता कार्यक्रम […]

संजय

रांची : सरकारी स्कूलों की बच्चियों को आठ महीने से सेनेटरी नैपकिन नहीं मिल रहा है. स्कूली बालिकाअों के बीच स्वच्छता को बढ़ावा देने और ड्रॉप आउट रोकने के लिए यह कार्यक्रम शुरू तो किया गया, लेकिन नैपकिन की खरीद नहीं होने के कारण फिलहाल यह बंद है.

पहले केंद्र ने स्कूली स्वच्छता कार्यक्रम शुरू किया था, तब बच्चियों को अनुदानित दर पर नैपकिन दिया जाता था. लेकिन वर्ष 2016 से झारखंड सरकार ने अपने फंड से यह योजना शुरू की. इसके तहत सरकारी तथा सरकारी सहायता प्राप्त 16,514 स्कूलों की 11.5 लाख बच्चियों को हर माह के लिए नैपकिन के पैकेट (छह पीस नैपकिन वाले) नि:शुल्क दिये जाते हैं.

कक्षा छह से 12वीं तक की लड़कियां इसकी लाभुक हैं. माना गया है कि इस कार्यक्रम से ग्रामीण परिवेश की लड़कियों में स्वच्छता को बढ़ावा मिलेगा, जो आर्थिक परेशानी, कम जागरूकता या दूसरी वजहों से हाइजेनिक नैपकिन का इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं. देखा यह भी गया था कि माहवारी के दिनों में लड़कियां स्कूल नहीं आती थीं. इन्हीं समस्याअों से निजात दिलाना इस कार्यक्रम का मकसद है. दुर्भाग्यवश बीते आठ महीने से यह कार्यक्रम बाधित है.

नैपकिन तक पहुंच नहीं

झारखंड खास कर इसके ग्रामीण इलाके में नैपकिन सभी महिलाअों-बालिकाअों की पहुंच में नहीं है. आर्थिक कारणों से अधिक जागरूकता का अभाव इसका कारण रहा है. वहीं, स्कूलों में नैपकिन वितरण के कार्यक्रम से स्थिति में सुधार हुआ है. मई 2018 तक झारखंड में माहवारी से गुजरनेवाली 76 फीसदी लड़कियों को नैपकिन उपलब्ध था, लेकिन गत आठ माह के दौरान स्थिति बिगड़ी है.

कॉरपोरेशन करता है खरीद

स्वास्थ्य विभाग तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की विभिन्न योजनाअों, कार्यक्रमों तथा स्थापना के लिए दवाएं, उपकरण, फर्नीचर व अन्य सामान की खरीद झारखंड स्टेट हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कॉरपोरेशन लि. करता है. नैपकिन की खरीद भी इसी को करनी है. इस संबंध में बताया गया कि तकनीकी कारणों से नैपकिन की खरीद में विलंब हुआ है.

कोट

सभी तरह की परचेजिंग का काम प्रोक्योरमेंट कॉरपोरेशन करता है. टेंडर निकालने से लेकर खरीद तक का काम उसी का है. नैपकिन मामले में टेंडर फाइनल नहीं हो सका. कोई तकनीकी वजह होगी. हालांकि, कॉरपोरेशन में मानव संसाधन की कमी नहीं है. पर हां! नैपकिन की खरीद में विलंब तो हुआ है.

डॉ विजय शंकर दास, निदेशक प्रमुख स्वास्थ्य

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