सभी विवि के वीसी को भेजा गया पत्र
खादी, सूत कातनेवालों व बुनकरों को प्रोत्साहित करने की है योजना
रांची : विश्वविद्यालयों में आयोजित होनेवाले दीक्षांत समारोह और कॉलेजों में होनेवाले डिग्री वितरण समारोह में खादी और हथकरघा कपड़े के उपयोग की अपील की गयी है. इस संबंध में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी विवि के कुलपति को पत्र भेज दिया है.
यूजीसी सचिव प्रो रजनीश जैन ने कहा है कि प्रधानमंत्री ने खादी के उपयोग और हथकरघा के पुनरुद्धार को काफी महत्व दिया है. महात्मा गांधी ने भारतीय स्वतंत्रता के संघर्ष के दौरान हाथ से काते गये अौर हथकरघा कपड़े, खादी का उपयोग एक हथियार के रूप में किया था.
इसलिए इसे स्वतंत्रता की वर्दी के रूप में भी जाना जाता है. सचिव ने कहा है कि खादी अौर हथकरघे का कपड़ा न केवल हमारी संस्कृति अौर विरासत का एक अभिन्न अंग है,
बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहनेवाले लाखों लोगों को आजीविका का अवसर भी देता है. पत्र में लिखा गया है कि विवि से अनुरोध है कि दीक्षांत समारोह जैसे विशेष अवसर पर परिधान के लिए खादी या अन्य हथकरघा कपड़े के उपयोग पर विचार करें. संबंद्ध कॉलेजों को भी जानकारी दें.
खादी का उपयोग सिर्फ भारतीय होने का गौरव ही नहीं करायेगा, बल्कि गर्म अौर आर्द्र मौसम में भी आरामदायक होगा. साथ ही सूत कातनेवालों और बुनकरों को प्रोत्साहन मिलेगा.
पिछले वर्ष से गाउन का प्रचलन हुआ बंद, भारतीय पोशाक पहन रहे हैं विद्यार्थी
विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह में ब्रिटिशकाल से गाउन पहनने का रिवाज चल रहा था. पिछले वर्ष विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने भारतीय पोशाक में दीक्षांत समारोह का आयोजन करने का निर्देश दिया.
इसके तहत छात्र सफेद कुर्ता-पाजामा या सफेद धोती-कुर्ता पहन रहे हैं. दूसरी तरफ छात्राएं सफेद रंग की लाल पाड़ वाली साड़ी और सफेद ब्लाउज या सफेद सलवार सूट पर लाल रंग का दुपट्टा का इस्तेमाल कर रही हैं. वहीं विश्वविद्यालय के अधिकारी और कमेटी सदस्य पगड़ी का इस्तेमाल कर रहे हैं.
