रांची :सरकार की नीतियां वनवासियों के हितों के खिलाफ : मंच

वन अधिकार रक्षा मंच ने राजभवन के सामने दिया धरना रांची : वन अधिकार रक्षा मंच के सदस्यों ने सरकार की नीतियों की आलोचना की है. मंच के सदस्यों ने शनिवार को राजभवन के सामने धरना दिया. धरने को संबोधित करते हुए सदस्यों ने कहा कि झारखंड में वन निवासियों के खिलाफ नीतियां बनायी जा […]

वन अधिकार रक्षा मंच ने राजभवन के सामने दिया धरना
रांची : वन अधिकार रक्षा मंच के सदस्यों ने सरकार की नीतियों की आलोचना की है. मंच के सदस्यों ने शनिवार को राजभवन के सामने धरना दिया. धरने को संबोधित करते हुए सदस्यों ने कहा कि झारखंड में वन निवासियों के खिलाफ नीतियां बनायी जा रही हैं.
आनेवाले विधानसभा चुनाव से पूर्व सभी राजनीतिक दलों को वन वासियों के प्रति अपना रवैया स्पष्ट करना चाहिए. 2019 में सत्ताधारी पार्टी ने दो बड़े नीतिगत कदम उठाये हैं. इससे 10 करोड़ से अधिक वनाश्रित समुदाय के लोगों का परंपरागत हक खतरे में है. अंग्रेजों के जमाने से आज तक किसी भी सरकार ने इतना बड़ा हमला नहीं किया था.
10 मार्च को केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों को एक पत्र भेजकर भारतीय वन कानून 1927 में व्यापक संशोधन का प्रस्ताव भेजा था. इसमें कहा गया था कि सरकार वन रक्षा के नाम पर लोगों पर गोली भी चला सकती है. ऐसा करनेवाले अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी. सुप्रीम कोर्ट में कई वनवासियों के मामलों में सरकार खामोश रही है.
इसी कारण 13 फरवरी 2019 को अदालत ने वन में रहनेवालों को बेदखल करने का आदेश जारी कर दिया है. झारखंड सरकार में भी इच्छाशक्ति की कमी के कारण वन वासियों को परेशानी हो रही है. इस मौके पर मंच के प्रेमचंद मुर्मू, जॉर्ज मोनोपॉली, प्रभाकर तिर्की, अंतू तिर्की, रोस खाखा, जेराम कुजूर व सुनीता कुमारी के साथ-साथ कई लोग मौजूद थे.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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