रांची : आजाद हिंद फौज में लेफ्टिनेंट रहे स्व वाणेश्वर राय के परिवार को रघुवर सरकार से सहायता की उम्मीद है. उनके तीन बेटों में से दो रंजन राय व विजय राय जीवित हैं तथा किसी तरह अपना परिवार चला रहे हैं. घर की हालत ठीक नहीं रहने से एक दिवंगत भाई की पत्नी मायके में रहती है.
नामकुम के रामपुर बाजार के पास स्व राय जिस घर में रहते थे, वह भी उनका नहीं था. वह ससुर के घर पर पत्नी व पांच बच्चों के साथ रहते थे, जहां अब भी उनका परिवार रह रहा है. 2005 में वाणेश्वर राय का निधन हो गया था. आजाद हिंद फौज में इंटेलिजेंस ग्रुप के सदस्य रहे स्व राय ने 1991 में (तब वह 72 वर्ष के थे) प्रभात खबर से कहा था: जब हम आजाद हिंद फौज के रूप में लड़ रहे थे, तब यह बात दिमाग में थी कि देशवा घर होगा, घरवा देश होगा. उन्होंने कहा था- आज तीन तरह से काम हो रहा है- पैरवी, पैसा व दादागीरी, पर मेरे पास इनमें से कोई नहीं है. मेरी बात छोड़िए. वर्मा के जंगलों में भारत-वर्मा सीमा पर जो हजारों भारतीय सिपाही शहीद हो गये, उनकी विधवाअों का क्या हुआ? उनके बाल-बच्चे कहां हैं?
राज्यपाल ने देने का दिया था सुझाव : बिहार के तत्कालीन राज्यपाल वेंकट सुबैया को 15.5.1986 को पत्र लिख कर वाणेश्वर राय ने सहायता मांगी थी. इसके बाद राज्यपाल ने 3.6.1986 को जिला प्रशासन को भूमि उपलब्ध कराने का सुझाव दिया था, पर इस पर आज तक अमल नहीं हो सका.
