रांची : मुख्यमंत्री आवास का घेराव 15 को : मंच

राज्य में जनजातीय धर्म और संस्कृति की पहचान बचाने पर जोर रांची : जनजाति सुरक्षा मंच ने कहा है कि असली जनजातियों तक नौकरियों में आरक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच रहा है. इसका 80 प्रतिशत लाभ धर्मांतरित उठा रहे हैं. इसलिए मूल जनजातियों की स्थिति आज भी बदहाल है़ इस विषय पर […]

राज्य में जनजातीय धर्म और संस्कृति की पहचान बचाने पर जोर
रांची : जनजाति सुरक्षा मंच ने कहा है कि असली जनजातियों तक नौकरियों में आरक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच रहा है. इसका 80 प्रतिशत लाभ धर्मांतरित उठा रहे हैं. इसलिए मूल जनजातियों की स्थिति आज भी बदहाल है़ इस विषय पर सरकार को सचेत करने के लिए 15 सितंबर को सीएम हाउस के मुख्य द्वार का घेराव किया जायेगा़
इससे पूर्व दिन के 11 बजे हजारों लोग मोरहाबादी मैदान में जुटेंगे और वहां से जनजाति धर्म व संस्कृति की पहचान बचाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करेंगे़ यह जानकारी जनजाति सुरक्षा मंच के संदीप उरांव, जगलाल पाहन, सोमा उरांव, अर्जुन राम व डॉ सुखी उरांव ने आरोगय भवन, बरियातू रोड में दी.
धर्मांतरित विवाहिता को नहीं मिले जाति प्रमाण पत्र : संदीप उरांव ने कहा कि यदि माता- पिता व संतान जनजाति धार्मिक आस्था व रूढ़िवादी परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं, तभी संतान को जनजाति प्रमाण पत्र मिलना चाहिए़ धर्मांतरित विवाहिता को पिता की जाति के अाधार पर अजजा प्रमाण पत्र नहीं दिया जाये़
धर्मांतरित जनजाति को अजजा आरक्षण से वंचित करना चाहिए़ पेसा कानून के तहत ग्राम प्रधान, मुखिया और प्रखंड प्रमुख से लेकर जिला परिषद के अध्यक्ष तक के एकल पद मूल जनजातीय धर्म, आस्था, रीति- रिवाज और रूढ़िवादी परंपराओं को माननेवालों के लिए आरक्षित है, पर झारखंड में इसकी अवहेलना कर धर्मांतरित अल्पसंख्यकों को इन पदों पर चुना जा रहा है़
इसकी जांच कर त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए़ सीएनटी व एसपीटी एक्ट का उल्लंघन कर ईसाई मिशनरियों द्वारा चर्च, स्कूल, अस्पताल व अनाथालय बनवाये गये है़ं अन्य असामाजिक तत्वों द्वारा भी हजारों एकड़ जमीन लेकर एक्ट का उल्लंघन किया गया है़ इसकी उच्च स्तरीय जांच करा कर रैयतों को मालिकाना हक दिलाया जाये़

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