रांची : राज्य के सभी 120 निबंधित बाल गृहों को एक-एक लेडी सुपरवाइजर (महिला पर्यवेक्षक) तथा संबंधित प्रोजेक्ट की बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) से संबद्ध किया जाना है. इनका काम उस बाल गृह की सतत मॉनिटरिंग करना, बच्चों से बातें करना और यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी बच्चे के साथ कोई प्रताड़ना नहीं हो. यदि वहां ऐसे किसी मामले का पता चलता है, तो इसके लिए संबंधित लेडी सुपरवाइजर व सीडीपीओ को जिम्मेदार माना जायेगा.
दूसरी ओर यह व्यवस्था सचिव के आदेश के करीब चार माह बाद भी लागू नहीं हो सकी है. समाज कल्याण सचिव अमिताभ कौशल ने सभी उपायुक्तों को इससे संबंधित पत्र व विवरण भेजा था. उपायुक्तों से कहा गया था कि वह अपने-अपने जिले के सभी निबंधित बाल गृहों से एक-एक लेडी सुपरवाइजर व सीडीपीओ को संबद्ध कर उन्हें उनके कार्यों को लेकर निर्देश दें. इधर, ज्यादातर जिलों में किसी पदाधिकारी को बाल गृहों से संबद्ध नहीं किया गया है.
व्यवस्था ठीक नहीं : सचिव अमिताभ कौशल ने अपने पत्र में जिक्र किया था कि कुछ समय पूर्व बाल संरक्षण आयोग तथा जिला निरीक्षण समितियों ने जब कुछ बाल गृहों का निरीक्षण किया था, तो इन गृहों/संस्थानों में रहनेवाले बच्चों की देखभाल व संरक्षण विहित प्रावधानों के अनुरूप नहीं होने का पता चला था. चिकित्सा की सुविधा के साथ बाल गृह में जगह की कमी थी. शौचालय की स्थिति खराब मिली थी और फ्लश काम नहीं करता था.
