रांची विवि की लेटलतीफी के कारण कोर्स हुआ एक साल पीछे, विद्यार्थी भी रह रहे हैं परेशान
2017-18 सत्र की फाइनल परीक्षा ही नहीं ले पाये हैं विवि के कई विभाग
नये सत्र के लिए नहीं हो पायी है प्रवेश परीक्षा
रांची : रांची विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा मजाक बनकर रह गयी है. एक साल का एमफिल कोर्स दो साल का हो गया है और लेट लतीफी का आलम ऐसा है कि 2018-19 सत्र में एडमिशन ही नहीं हो पाया. वहीं 2017-18 की फाइनल परीक्षा पीजी के कई विभागों ने नहीं ली है. अभी तक विवि प्रशासन एमफिल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा है.
दो साल पहले हुआ था एमफिल में एडमिशन
रांची विश्वविद्यालय के एमफिल कोर्स में दो साल पहले 2017 में एडमिशन लिया गया था. विवि के सभी 22 पीजी विभागों में 220 सीटों के लिए एडमिशन हुआ था. यह कोर्स एक साल में पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. 2019 के अगस्त महीने तक इस सत्र (2017-18) का फाइनल रिजल्ट जारी नहीं हो पाया है. इस देरी के कारण 2018-19 सत्र में अभी तक एडमिशन ही नहीं हुआ है. विवि प्रवेश परीक्षा के माध्यम से एमफिल में एडमिशन लेता है. लेकिन कुछ दिन पहले तक एमफिल प्रवेश परीक्षा के फार्म ही भरे जा रहे थे.
पीजी के सभी विभागों को 15 अगस्त तक का समय एमफिल परीक्षा कराने का दिया गया था. लेकिन अभी तक केवल 10 विभागों की ओर से ही फाइनल परीक्षा ली गयी है. 2018-19 सत्र के लिए अभी प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाना है. इसके बाद एडमिशन प्रक्रिया शुरू होगी.
– डॉ राजेश कुमार, परीक्षा नियंत्रक, रांची विवि
विभागों की लापरवाही से लेट हो गया सत्र
विवि के पीजी विभागों की लापरवाही के कारण एमफिल का सत्र लेट हो गया है. विवि के 22 पीजी विभागों में एमफिल की पढ़ाई दो सेमेस्टर में करायी जाती है. फाइनल परीक्षा के लिए विवि के परीक्षा विभाग से कहा गया था कि 15 अगस्त तक सभी पीजी विभाग परीक्षा की प्रक्रिया पूरी करके परीक्षा विभाग को सभी मार्क्स भेज दें.
इसमें 10 विभागों ने तो समय से प्रक्रिया पूरी कर परीक्षा विभाग को मार्क्स भेज दिये. लेकिन 12 विभागों ने विवि की डेडलाइन पार हो जाने के बाद भी मार्क्स नहीं भेजे हैं. इस लापरवाही के कारण विलंब का क्रम बढ़ता जा रहा है. विद्यार्थियों के करियर पर इसका असर पड़ रहा है.
पीएचडी के लिए एफमिल को मिलती है प्राथमिकता
पीएचडी करनेवाले विद्यार्थियों को एमफिल करने से फायदा होता है. देश के कई विश्वविद्यालय में एमफिल करनेवाले विद्यार्थियों को पीएचडी प्रवेश परीक्षा में शामिल नहीं होना पड़ता है. उनका कोर्स वर्क में एडमिशन हो जाता है और इसके बाद सीधे रजिस्ट्रेशन हो जाता है.
रांची विवि से एमफिल कर रहे 2017-18 बैच के विद्यार्थियों का एक साल बर्बाद हो गया है. वह अगर पास होने के बाद किसी दूसरे विवि में भी पीएचडी के लिए अप्लाइ करते हैं, तो वह एक साल पीछे हो जायेंगे.
