रांची : एप्रोच रोड के बिना बेकार पड़ा है 2.74 करोड़ का पुल

उत्तम महतो चाहिए आठ डिसमिल जमीन, रैयत देने को तैयार, विभाग बेपरवाह रांची : विद्यानगर को हरमू से जोड़ने के लिए हरमू नदी पर 2.74 करोड़ रुपये की लागत से बना पुल करीब तीन साल से बेकार पड़ा है. ऐसा इसलिए क्योंकि विद्यानगर वाले हिस्से में आज तक एप्रोच रोड नहीं बन पाया है. जानकारों […]

उत्तम महतो
चाहिए आठ डिसमिल जमीन, रैयत देने को तैयार, विभाग बेपरवाह
रांची : विद्यानगर को हरमू से जोड़ने के लिए हरमू नदी पर 2.74 करोड़ रुपये की लागत से बना पुल करीब तीन साल से बेकार पड़ा है. ऐसा इसलिए क्योंकि विद्यानगर वाले हिस्से में आज तक एप्रोच रोड नहीं बन पाया है. जानकारों के अनुसार जिस जमीन पर एप्रोच रोड बनाना है, वह रैयती है. रैयत जमीन देने को तैयार भी है, लेकिन संबंधित विभाग के ढुलमुल रवैये के कारण आज तक इस समस्या का समाधान नहीं हो पाया है.
गौरतलब है कि वर्ष 2015 में जब मुख्यमंत्री रघुवर दास हरमू नदी का शिलान्यास करने के लिए पहुंचे थे, तो विद्यानगर के निवासियों ने उनसे पुल बनवाने की मांग की थी. कहा था कि अगर पुल बन गया, तो विद्यानगर, गंगानगर, यमुनानगर की करीब 15 हजार आबादी और अन्य क्षेत्र के हजारों लोगों को आवागमन में काफी सुविधा होगी.
इस पर मुख्यमंत्री ने तत्काल पुल बनाने की घोषणा कर दी. वर्ष 2016 में ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल ने यहां पुल बना दिया. साथ ही हरमू वाले हिस्से में एप्रोच रोड भी बन गया, लेकिन विद्यानगर वाले हिस्से में मात्र आठ डिसमिल जमीन के अभाव में एप्रोच रोड नहीं बन पाया. मजबूरन आज भी इस इलाके के लोग करम चौक के समीप छोटी पुलिया से होकर आना-जाना करते हैं.
हमने रैयतों से बात की है, वह जमीन देने को तैयार हैं. बशर्ते प्रशासन उन्हें जमीन के एवज में उचित मुआवजा दे. अगर सरकार जमीन अधिग्रहण करके पुल तक एप्रोच रोड पथ नहीं बनाती है, तो यह पुल पूरी तरह से यूजलेस पुल है.
विनोद सिंह, पार्षद, वार्ड नंबर – 34
लोगों ने मांग रखी, हमने पुल बनवा दिया. जिस जगह पुल बना है, वह आवास बोर्ड की जमीन थी. अब अगर एप्रोच रोड के लिए जमीन अधिग्रहण की जरूरत है, तो लोग आगे आयें, हम जमीन अधिग्रहण के लिए भी रैयतों से बात करेंगे.
सीपी सिंह, नगर विकास मंत्री

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