मनोज सिंह, रांची : कृषि विभाग के अधिकारियों की गलती के कारण प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ अयोग्य लाभुकों को भी मिल गया. इससे विभाग की परेशानी बढ़ गयी है. इस योजना के लाभुकों के चयन में कृषि विभाग ने केंद्र के दिशा-निर्देश का पालन नहीं किया गया.
आनन-फानन में पौने पांच लाख लाभुकों के खाते में दो-दो हजार रुपये ट्रांसफर कर दिये गये. लाभुकों की यह सूची पिछले साल (2018) की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से तैयार कर ली गयी थी. इसमें कई वैसे लाभुकों को भी पैसा मिल गया, जिनके पास जमीन ही नहीं है.
वहीं, कई ऐसे लाभुक भी हैं, जो टैक्स देते हैं या सरकारी सेवा से रिटायर हुए हैं. मामला सामने आने के बाद अब विभाग के अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं. एक वरीय अधिकारी ने तो स्वीकार किया कि गलती सुधारने की कोशिश हो रही है. सरकार वैसे लाभुकों को चिह्नित करने की कोशिश कर रही है, जो योजना का लाभ नहीं ले सकते हैं, लेकिन उनके खाते में पैसा चला गया है.
लाभुकों के खाते में 100 करोड़ : इस स्कीम के लाभुकों के खाते में 100 करोड़ रुपये ट्रांसफर हो गये हैं. राज्य सरकार का दावा है कि योजना के करीब पौने पांच लाख लाभुक हैं. इममें से चार लाख को पहली व दूसरी किस्त मिल चुकी है. सरकार 35 लाख लाभुकों का आंकड़ा छूने के लिए नये लाभुकों की सूची भी तैयार कर रही है.
प्रभात खबर ने की पड़ताल
मामला प्रकाश में आने के बाद प्रभात खबर ने कांके के कई गांवों में लोगों से मुलाकात की और योजना के सिलसिले में जानकारी ली. पिठोरिया में कई ऐसे मामले प्रकाश में आये, जिनके परिवार के कई सदस्यों को इस योजना में दो-दो हजार रुपये मिले हैं.
रैयत समन्वय समिति के सदस्य रितेश दीपक के पिता ने भी योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया था. उनका नाम पंजी-2 में भी है. लेकिन उनको पैसा नहीं मिला. गांव के प्रगतिशील किसान नकुल महतो ने पांच एकड़ जमीन के कागजात के साथ इस योजना के लिए आवेदन दिया था. उनके खाते में भी एक भी पैसा नहीं आया.
यही स्थिति एस केशरी और आरके मिश्र की भी है. कांके के ही गारू गांव में इसी तरह की शिकायत मिली. वहां के कृषक मित्र ने स्वीकार किया कि उनके और उनकी पत्नी दोनों के खाते में पहली किस्त की राशि गयी है. जबकि जमीन केवल उसके नाम से है. इसी गांव के कई लाभुकों ने स्वीकार किया कि जमीन उनके नाम से नहीं है, लेकिन उन्हें पैसा मिला है.
पौने पांच लाख से अधिक किसानों को मिला लाभ, हो रही मामले की जांच
मामला सामने आने के बाद अब विभाग के अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं
क्या था नियम
भारत सरकार ने यह योजना एक दिसंबर 2018 को लागू की थी. योग्य किसानों की पहचान का कट अॉफ डेट एक फरवरी 2019 रखा गया था. इसमें जिक्र किया गया था कि लाभुक वही होंगे, जिनका नाम सरकार के पंजी-2 में हो. वैसे किसान लाभुक नहीं होंगे, जो वर्तमान या पूर्व में किसी संवैधानिक पद पर रहे हों. जो मंत्री, लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा, विधान परिषद, वर्तमान या पूर्व मेयर या जिला पंचायत के अध्यक्ष हों.
किसी भी सरकारी और गैर सरकारी संस्थान से रिटायर होनेवाले कर्मी और अधिकारी (वर्ग चार को छोड़कर), सेवानिवृत्त वैसे कर्मी जिनकी मासिक आय 10 हजार रुपये से अधिक हो, जो टैक्स देने वाले हो तथा प्रोफेशनल्स (डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, आर्किटेक्ट, अधिवक्ता आदि) हैं, को इसका लाभ नहीं मिलेगा.
क्या थी आवेदन की प्रक्रिया
इस स्कीम का लाभ लेने के लिए सभी अंचल कार्यालय से पंजी-2 में नाम के आधार पर एक आवेदन फॉर्म तैयार किया गया था. आवेदन फाॅर्म पंचायत पर बनी रैयत समन्वय समिति (इसी काम के लिए बनायी गयी है) को दिया गया था.
रैयत समन्वय समिति को संबंधित लोगों के पास जाकर आवेदन फॉर्म में एकाउंट नंबर, आधार नंबर आदि भरवाना था. इसे अंचल कार्यालय में जमा करना था. अंचलाधिकारी के सत्यापन के बाद इसे उपायुक्त के पास जाना था. वहां से अनुमोदन के बाद राज्य स्तर पर इसकी इंट्री करायी जानी है.
अब किया जा रहा है लाभुक चयन प्रक्रिया में बदलाव
भारत सरकार ने राज्य सरकार के आग्रह पर इस स्कीम के लाभुकों के चयन के लिए विशेष छूट दी है. अब प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभुकों का चयन भी मुख्यमंत्री आशीर्वाद योजना की तर्ज पर होगा. इस योजना के लाभुक का चयन वंशावली के आधार पर होगा. खतियान अपडेट नहीं होने के कारण राज्य सरकार ने वंशावली के आधार पर लाभुक चयन करने का निर्णय लिया है. इससे 35 लाख किसानों को लाभ देने की योजना है.
