रांची : जांच के लिए खाद्य सैंपल खरीदने के भी पैसे नहीं

संजय रांची : राज्य के कई एसडीओ के पास खाद्य सैंपल (नमूना) खरीदने के लिए फंड नहीं है. फंड नहीं रहने के कारण संबंधित एसडीओ खाद्य संरक्षा पदाधिकारी (फूड सेफ्टी ऑफिसर या एफएसओ) को पैसे नहीं दे रहे हैं. इससे राज्य भर में जांच के लिए खाद्य सैंपल इकट्ठा करने का काम लगभग ठप है. […]

संजय
रांची : राज्य के कई एसडीओ के पास खाद्य सैंपल (नमूना) खरीदने के लिए फंड नहीं है. फंड नहीं रहने के कारण संबंधित एसडीओ खाद्य संरक्षा पदाधिकारी (फूड सेफ्टी ऑफिसर या एफएसओ) को पैसे नहीं दे रहे हैं. इससे राज्य भर में जांच के लिए खाद्य सैंपल इकट्ठा करने का काम लगभग ठप है.
हालत यह है कि गत दो माह में सिर्फ तीन जिलों से कुल 13 सैंपल आये हैं. इनमें से अकेले आठ कोडरमा जिले के हैं. यहां चुनाव के दौरान खराब भोजन की शिकायत पर आठ सैंपल लिये गये थे. वहीं लोहरदगा से दो तथा पलामू जिले से तीन सैंपल आये हैं. शेष जिलों से खाद्य जांच प्रयोगशाला को मिले खाद्य सैंपल की संख्या शून्य है.
एक एफएसअो ने बताया कि वह फूड सैंपल खरीदने के लिए पैसे मांग रहे हैं, पर मिल नहीं रहा है. खाद्य निदेशालय से इस संबंध में बात करने पर बताया गया कि स्वास्थ्य विभाग से सभी एसडीअो को 25-25 हजार रुपये आवंटित करने की प्रक्रिया चल रही है. गौरतलब है कि इन्हीं एफएसअो पर राज्य में अब तक निबंधित या लाइसेंस प्राप्त 36563 होटलों, ढाबों, रेस्तरां व बड़ी संख्या में खाने-पीने का सामान बेच रहे ठेले-खोमचों पर नजर रखने की जिम्मेदारी है.
पहले राज्य भर में सिर्फ दो एफएसअो थे. 22 नये एफएसअो के आने के बाद यह संख्या 24 हो गयी है. संख्या बढ़ने के बावजूद झारखंड में खाद्य संरक्षा व मानक अधिनियम-2006 के प्रावधानों को बेहतर तरीके से लागू नहीं किया जा सका है.
लाइसेंस व निबंधन जरूरी : खाद्य पदार्थों के भंडारण, संग्रहण, परिवहन व बिक्री में लगे सभी व्यक्ति या फर्म को खाद्य संरक्षा व मानक अधिनियम के तहत लाइसेंस लेना या निबंधित होना अनिवार्य है.
इसके बाद ऐसे सभी लोगों पर सरकार, फूड सेफ्टी अफसर के माध्यम से नजर रखती है. उन्हें खाने-पीने की चीजों में मिलावट या उनकी पैकेजिंग में गड़बड़ी करने से रोकती है तथा खाद्य व्यवसायियों को साफ-सफाई व स्वच्छता बनाये रखने को बाध्य करती है.

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