बालगृहों में पर्यवेक्षक व सीडीपीओ को करनी है निगरानी

रांची : राज्य के सभी 120 निबंधित बालगृहों (चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशंस) को एक-एक लेडी सुपरवाइजर (महिला पर्यवेक्षक) तथा संबंधित प्रोजेक्ट की बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) से संबद्ध किया जाना था. पर यह काम एक फरवरी को पत्र निर्गत होने के चार माह बाद भी नहीं हो सका है. इधर, 29 मई को मुख्यमंत्री की […]

रांची : राज्य के सभी 120 निबंधित बालगृहों (चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशंस) को एक-एक लेडी सुपरवाइजर (महिला पर्यवेक्षक) तथा संबंधित प्रोजेक्ट की बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) से संबद्ध किया जाना था. पर यह काम एक फरवरी को पत्र निर्गत होने के चार माह बाद भी नहीं हो सका है. इधर, 29 मई को मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक के दौरान उपायुक्तों को इसकी याद दिलायी गयी है.

दरअसल, समाज कल्याण सचिव ने उपायुक्तों को पत्र लिख कर उनसे अपने-अपने जिले के सभी निबंधित बाल गृहों से एक-एक लेडी सुपरवाइजर व सीडीपीओ को संबद्ध कर उन्हें उनके कार्यों संबंधी निर्देश देने तथा उनकी सूची विभाग को उपलब्ध कराने को कहा था. इसी के साथ उपायुक्तों को किशोर न्याय अधिनियम 2015 तथा झारखंड किशोर न्याय नियम-2017 के प्रावधान की जानकारी देते हुए सबको सुनिश्चित कराने को कहा गया है,.
उपायुक्तों से कहा गया था कि वे उपरोक्त बिंदु पर कार्रवाई सुनिश्चित कर विभाग को अनुपालन प्रतिवेदन (रिपोर्ट) दें. गौरतलब है कि रांची में ही कुछ बाल गृहों में बच्चों को बेच देने या अन्यत्र ले जाने सहित अन्य शिकायतों के बाद बाल गृहों को सुरक्षित व बच्चों के अनुकूल बनाने के दिशा में यह निर्देश जारी हुआ था.
सुपरवाइजर व सीडीपीअो का काम
किसी बाल गृह से संबद्ध लेडी सुपरवाइजर व सीडीपीअो का काम उस बाल गृह की सतत मॉनिटरिंग करना, बच्चों से बात करना तथा यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी बच्चे के साथ किसी तरह की कोई प्रताड़ना नहीं हो रही हो. यदि वहां ऐसे किसी मामले का पता चला है, तो इसके लिए संबंधित लेडी सुपरवाइजर व सीडीपीओ को जिम्मेदार माना जायेगा.
व्यवस्था ठीक नहीं : विभागीय सचिव ने अपने पत्र में लिखा था कि कुछ समय पूर्व बाल संरक्षण आयोग तथा जिला निरीक्षण समितियों ने जब कुछ बाल गृहों का निरीक्षण किया था, तो इन गृहों/संस्थानों में रहने वाले बच्चों की देखभाल व संरक्षण विहित प्रावधानों के अनुरूप न होने का पता चला था. चिकित्सा की सुविधा तथा बाल गृह में जगह की कमी थी. शौचालय की स्थिति खराब मिली थी. फ्लश काम नहीं करता था.
बाल गृहों में किशोर न्याय अधिनियम/नियम के तहत यह जरूरी
  • संबंधित पोर्टल पर ट्रैक चाइल्ड डाटा लगातार अपडेट हो
  • बाल गृह के बच्चों की संख्या हर माह जिला बाल संरक्षण इकाई को देना
  • बाल गृह में सीसीटीवी सहित बाल सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना
  • बाल गृह के सभी बच्चों का अलग-अलग केयर प्लान बनाना जरूरी
  • बाल गृह में कंप्यूटर, टेलीफोन सुविधा व वोकेशनल ट्रेनिंग सुनिश्चित कराना
  • गृह में चिकित्सा सुविधा, बाल समिति व प्रबंधन समिति कार्यरत रहना
  • संचालक एनजीओ की पृष्ठभूमि की तत्काल जांच तथा कर्मियों का पुलिस वेरिफिकेशन

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