रांची : बिशप डॉ निर्मल मिंज की पुस्तक ‘इन्नेलता एड़पा उरूबनी’ व फादर अलबिनुस मिंज की पुस्तक ‘कुड़ुख हास भाषी’ पुस्तक रांची विश्वविद्यालय के सिलेबस से हटाने की मांग की गयी है. रांची विश्वविद्यालय में स्नातक स्तर पर जनजातीय भाषा में कुड़ुख भाषा में पढ़ाई होती है.
‘इन्नेलता एड़पा उरूबनी’ किताब में धर्मातंरण के बारे में पढ़ाये जाने की शिकायत मंगलवार को विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ रमेश कुमार पांडेय से की गयी. कुलपति ने प्रतिनिधिमंडल को विवादित किताब सिलेबस से हटाने का आश्वासन दिया. फादर अलबिनुस मिंज की पुस्तक ‘कुड़ुख हासा भाषी’ पुस्तक पढ़ाये जाने की भी समीक्षा की जायेगी. इस पर आपत्ति जतायी गयी है. समीक्षा के बाद इसे भी हटाया जा सकता है.
झारखंड आदिवासी सरना विकास समिति, जनजाति सुरक्षा मंच व केंद्रीय युवा सरना विकास समिति के प्रतिनिधिमंडल ने रांची विवि के वीसी डॉ रमेश कुमार पांडेय से मुलाकात कर बिशप डॉ निर्मल मिंज की पुस्तक ‘इन्नेलता एड़पा उरूबनी’ व फादर अलबिनुस मिंज की पुस्तक ‘कुड़ुख हासा भाषी’ को रांची विवि के पाठ्यक्रम से हटाने की मांग की है़ मेघा उरांव, सोमा उरांव व संदीप उरांव ने कहा कि किताब में यह दिखाया गया है कि कैसे एक सरना आदिवासी को ईसाई बनाया गया है .
इससे धर्मांतरण को बढ़ावा मिलेगा़ इससे पूर्व भी बिशप डॉ निर्मल मिंज की ‘कुड़ुख कत्त्था डंडी झरिया पंडी’ पुस्तक को विवि के पाठ्यक्रम से हटाया गया था. प्रतिनिधिमंडल में नमित हेमरोम, जयमंत्री उरांव, कुमुदनी लकड़ा, सोनू लकड़ा, विकास मुंडा, संजय महतो, बबन बैठा, तरुण पाहन व अन्य शामिल थे़
वीसी ने दिया मामले में कार्रवाई का आश्वासन
एक सप्ताह में होगी कार्रवाई : कुलपति
रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ रमेश कुमार पांडेय ने कहा कि विवादित किताब को पाठ्यक्रम से हटाया जायेगा. एक सप्ताह में इसकी कार्रवाई शुरू कर दी जायेगी.
डॉ हरी उरांव ने कहा पाठ्यक्रम में नहीं है किताब
पाठ्यक्रम समिति के सदस्य सह कुड़ुख भाषा के विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉ हरी उरांव ने कहा कि किताब को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय पाठ्यक्रम समिति का होता है. उन्हें किताब धर्म परिवर्तन के बारे में बतायी गयी बातों की जानकारी नहीं है. बाद में इस संबंध में उन्होंने कहा कि किताब पाठ्यक्रम में हैं ही नहीं.
