मनोज सिंह
रांची : महिला सहायता समूहों को 80 करोड़ रुपये की लागत से बांटी जाने वाली कृषि यांत्रिकीकरण का काम इस बार झारखंड एग्रीकल्चरल मशीनरी टेस्टिंग एंड ट्रेनिंग सेंटर (जेएएमटीटीसी) करायेगा. पहले यह काम भूमि संरक्षण निदेशालय करा रहा था. जेएएमटीटीसी कृषि विभाग की एजेंसी है, जो मशीन जांचने का काम करती है. कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग ने इस स्कीम के संचालन के लिए राज्यादेश वित्तीय वर्ष समाप्त होने से दो माह पहले एक फरवरी को निकाला है.
कैबिनेट में भेजने का आया था प्रस्ताव : राज्यादेश के प्रारूप में बदलाव (पैसा निकालकर पीएल खाते में डालने और एजेंसी बदलने) संबंधी संचिका को कृषि विभाग के अधिकारियों ने कैबिनेट में भेजने का प्रस्ताव दिया था.
इस प्रस्ताव को विभाग के मंत्री और सचिव ने मानने से इनकार कर दिया था. इस कारण यह प्रस्ताव कैबिनेट में नहीं भेजा गया. विभाग ने मूल राज्यादेश में कृषि यांत्रिकीकरण का काम पूर्व की तरह भूमि संरक्षण निदेशालय से करने का प्रस्ताव दिया था. इसमें हाथ से लिखकर काम का नोडल एजेंसी जेएएमटीटीसी को तय करने का अनुमोदन किया गया. राज्यादेश में कृषि उपकरणों को सूचीबद्ध करने के लिए एकल एजेंसी के चयन का प्रस्ताव था. इसमें संशोधित करते हुए कई एजेंसियों को शामिल करने का निर्णय कर लिया गया है.
90 फीसदी अनुदान पर महिला समूहों को देना है यंत्र : इस स्कीम के तहत राज्य की महिला समूहों को 90 फीसदी अनुदान पर कृषि यंत्र देना है. इस पर 80 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान है. पिछले वित्तीय वर्ष (2017-18) में राज्य सरकार ने 70 करोड़ रुपये की लागत से महिला समूहों के बीच यंत्र देने का निर्णय लिया था. इससे पूर्व के वर्ष में 20 करोड़ रुपये की लागत से कृषि यंत्र बांटने का लक्ष्य रखा गया था. पिछले तीन साल में एक साल भी तय लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है.
मशीन टेस्टिंग करने वाली एजेंसी : जेएमएटीसीसी कृषि विभाग की एक एजेंसी है. इसका गठन झारखंड में उपयोग होने वाले मशीनों की टेस्टिंग के लिए किया गया है. टेस्टिंग में अनुमोदन के बाद ही कोई मशीन बेचने वाली कंपनी झारखंड में उपकरण बेच सकेगी. इसके अतिरिक्त एजेंसी मशीनों के संचालन का प्रशिक्षण भी किसानों को देती है.
बिना आवंटन के निकाला गया टेंडर : जेएएमटीटीसी ने इस काम के लिए टेंडर भी निकाल दिया है. इसके माध्यम से एजेंसियों को सूचीबद्ध किया जाना है. राजबाला वर्मा ने निगरानी आयुक्त रहते हुए 2010 में एक पत्र निकाला था, इसमें जिक्र किया था कि बिना आवंटन के किसी भी स्कीम का टेंडर करना गलत है.
स्कीम संशोधन को कैबिनेट की मंजूरी जरूरी : झारखंड सरकार को कोषागार संहिता के नियम 301 का कंडिका 9.2 में जिक्र है कि किसी भी ऑनगोइंग स्कीम में मूल रूप से कुछ परिवर्तन होता है. इसके लिए कैबिनेट और योजना प्राधिकृत समिति का अनुमोदन अनिवार्य है. इस स्कीम में संचालन एजेंसी के साथ-साथ महिला समूहों को मिलने वाली राशि के मोड में भी परिवर्तन किया गया है. इसमें सब्सिडी खाते के साथ-साथ डीलर को भी देने का प्रावधान किया गया है.
पिछले साल के बचे हैं 36 करोड़ रुपये : राज्य सरकार का 2017-18 में संचालित इस स्कीम का भी 36 करोड़ रुपये जैसमिन के खाते में पड़ा हुआ है. पिछले वित्तीय वर्ष की समाप्ति के समय राशि जैसमिन के खाते में डाल दी गयी थी. इसमें से मात्र 1.5 करोड़ रुपये के आसपास खर्च हुआ है. इस वर्ष यह राशि जेएएमटीटीसी के खाते में डाला गया है. दोनों एजेंसियों के प्रमुख एक ही व्यक्ति हैं.
वित्त विभाग ने लगा रखी है रोक
दो माह में चार हजार महिला समूहों के बीच कृषि यंत्र बांटा जाना है. इस राज्यादेश में ही जिक्र कर दिया है कि पैसा निकालकर जेएएमटीटीसी के पीएल खाते में डाल दिया जाये. दो जनवरी 2019 को राज्य के वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव सुखदेव सिंह ने सभी विभागों, बोर्ड, निगम व स्वायत्तशासी संस्थानों को पत्र लिख कर पीएल खाते में राशि डालने से रोक लगा दी है. उन्होंने लिखा है कि वित्त विभाग की अनुमति के बिना पीएल खाते में पैसा जमा नहीं करना है.
