रांची : झारखंड हाईकोर्ट के नये भवन निर्माण में हुई वित्तीय अनियमितता से संबंधित मामले में हाइकोर्ट ने वित्त सचिव को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. सचिव को यह बताने को कहा है कि क्या इस तरह के कार्य में बार-बार लागत बढ़ायी जा सकती है? क्या लागत बढ़ाने के लिए फ्रेश टेंडर […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
रांची : झारखंड हाईकोर्ट के नये भवन निर्माण में हुई वित्तीय अनियमितता से संबंधित मामले में हाइकोर्ट ने वित्त सचिव को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. सचिव को यह बताने को कहा है कि क्या इस तरह के कार्य में बार-बार लागत बढ़ायी जा सकती है? क्या लागत बढ़ाने के लिए फ्रेश टेंडर करने की जरूरत है?
क्या किसी से अनुमति लिए बगैर लागत बढ़ा दिये जाने को वैध माना जा सकता है? सचिव को आठ फरवरी तक शपथपत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है. राजीव कुमार की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अध्यक्षतावाली खंडपीठ ने शुक्रवार को यह निर्देश दिया.
प्रार्थी की ओर से अदालत को बताया गया कि कई बार भवन निर्माण की लागत बढ़ायी गयी है. यह वित्तीय मामला है. इसमें वित्त सचिव को शपथ पत्र दाखिल करना चाहिए. इस पर कोर्ट ने वित्त सचिव को शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया.
क्या है मामला : जनहित याचिका में कहा गया है कि अधिकारियों और संवेदक रामकृपाल कंस्ट्रक्शन लिमिटेड की मिलीभगत से वित्तीय अनियमितता हुई है. शुरुआत में हाइकोर्ट भवन के निर्माण के लिए 365 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गयी थी. बाद में 100 करोड़ घटा कर संवेदक को 265 करोड़ में टेंडर दे दिया गया.
वर्तमान इसकी लागत बढ़ कर लगभग 697 करोड़ रुपये हो गयी है. बढ़ी राशि के लिए सरकार से अनुमति भी नहीं ली गयी और न ही नया टेंडर किया गया. प्रार्थी ने इस मामले की जांच सीबीआइ से कराने का आग्रह किया है.