रांची. राज्य में सड़कों का घनत्व राष्ट्रीय औसत से कम है. देश में जहां प्रति सौ वर्ग किमी 182.4 किमी लंबी सड़कें हैं. वहीं झारखंड में यह लंबाई 86.26 किमी है. राज्य उच्च पथ (स्टेट हाइवे या एसएच) व मुख्य जिला सड़कों (मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड या एमडीआर) का घनत्व बढ़ाने के लिए करीब 7,660 किमी सड़कों को एसएच व एमडीआर में अपग्रेड करना होगा. राज्य सरकार का आकलन है कि 2.5 करोड़ प्रति किमी की लागत से इनके निर्माण पर लगभग 19,150 करोड़ रुपये खर्च होंगे.
यदि पांच चरणों में नयी सड़कों का निर्माण किया जाये, तो हर वर्ष 1,530 किमी लंबी सड़कों को अपग्रेड करना होगा. इसके लिए हर वर्ष 3,825 करोड़ रुपये की जरूरत होगी. राज्य सरकार का मानना है कि वह अपने स्नेत से इतनी राशि सड़कों पर खर्च नहीं कर सकती. इसलिए उसने केंद्र से मदद मांगी है. केंद्र को यह भी बताया गया है कि राज्य की कुल सड़कों की करीब 23 फीसदी सड़कें खनन व औद्योगिक क्षेत्रों में हैं. खास कर खनन गतिविधि से सड़कों पर बुरा असर होता है. यहां सड़कों के निर्माण व इसकी मरम्मत का खर्च अधिक है.
यह भी सूचित किया गया है कि राज्य की करीब 53 फीसदी सड़कें नक्सल प्रभावित 14 जिलों में हैं. यहां निर्माण या मरम्मती कार्य जोखिम भरा है. इस पूरी परिस्थिति के मद्देनजर राज्य सरकार ने माह भर पहले योजना आयोग से भी स्पेशल पैकेज की मांग की थी.
