रांची : झारखंड के शहरों में कुल 3607 शहरी बेघर हैं. इनके पास रहने का कोई ठिकाना नहीं है. वह सड़कों और फुटपाथ पर रात बिताते हैं. नगर विकास विभाग ने शहरी बेघरों का पता लगाने के लिए निकायों द्वारा सर्वेक्षण कराया है.
बेघरों के लिए राज्य सरकार शहरी आजीविका मिशन (डे-एनयूएलएम) के तहत आश्रय गृह संचालित कर रही है. नगर विकास सचिव अजय कुमार सिंह के निर्देश पर राज्य के 19 नगर निकायों में अब तक 40 आश्रय गृहों का संचालन किया जा रहा है. इनमें से 26 पुराने और 14 नये भवनों में संचालित हो रहे हैं.
श्री सिंह ने सभी नगर निकायों को बस स्टैंड, अस्पताल और सामुदायिक भवनों के पास आश्रय गृह तैयार करने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि आश्रय गृहों का प्रचार इस तरह होना चाहिए कि बेघरों को इसकी सूचना मिल जाये. आश्रय गृहों में बेघरों को मुफ्त में रात बिताने की जगह मिलेगी.
श्री सिंह ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्लम पुनर्विकास और भागीदारी में किफायती आवास के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और शहरी गरीबों को आवास दिलाने के लिए भी निकायों को निर्देशित किया है.
उन्होंने कहा है कि नगर निकायों द्वारा लाभुकों के चयन के बाद एलॉटमेंट लेटर के आधार पर बैंकों से लोन की व्यवस्था की जाये. लाभुकों को बतायें कि राज्य और केंद्र से मिलने वाली सब्सिडी को छोड़ अतिरिक्त राशि उनको अंशदान के रूप में खुद देनी होगी. इसके लिए उनको बैंक से लोन की व्यवस्था भी स्वयं ही करनी होगी. लोगों को अंशदान के रूप में 1.5 लाख रुपये देना होगा
15 साल की अवधि पूरा करने और लोन चुकता होने के बाद घर का मालिकाना हक लाभुक को मिलेगा. सचिव ने अधिकारियों को बैंकों के प्रतिनिधियों के साथ टीम बना कर रायपुर और गुजरात का दौरा करने का निर्देश दिया. कहा कि वहां की व्यवस्था के आधार पर वर्तमान नियमों का सरलीकरण भी किया जाये.
