रांची : ठंड बढ़ने के साथ ही शहरी बेघरों के लिए झारखंड सरकार द्वारा अबतक कोई योजना नहीं बनाये जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है. साथ ही राज्य सरकार से कहा कि वे जल्दी से जल्दी इस दिशा में ठोस प्रयास करें. जस्टिस मदन बी लोकूर की अध्यक्षता वाली एक पीठ को सूचित किया गया कि झारखंड व जम्मू-कश्मीर राज्य के अलावा अन्य सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों ने सर्दियों में शहरी बेघरों के लिए कार्य योजनाओं को अंतिम रूप दे दिया है.
पीठ ने जब झारखंड के वकील से इसके बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि उन्हें आज सुबह ही निर्देश प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अदालत को इस बारे में जानकारी देने के लिए एक दिन का समय मांगा. पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि झारखंड राज्य के पास सर्दी के लिए कोई योजना नहीं है. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.
हमें उम्मीद है कि झारखंड राज्य अगले कुछ दिनों में एक योजना तैयार कर लेगा, ताकि शहरी बेघरों को सर्दी के मौसम की अनिश्चितताओं से बचाया जा सके. जम्मू-कश्मीर के लिए पेश हुए वकील ने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में शहरी बेघरों की संख्या करीब 250 है और उन्हें कंबल व अन्य सुविधाएं देने के प्रावधान कर दिये गये हैं. वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता को अगले दो से तीन दिन में कार्ययोजना प्रदान कर दी जायेगी.
