नोवामुंडी प्रखंड के भनगांव में माइनिंग लीज मामले में सरकार से जवाब मांगा
अगली सुनवाई 12 दिसंबर को
रांची : झारखंड हाइकोर्ट में मंगलवार को चाईबासा के नोवामुंडी प्रखंड के भनगांव में एलिफैंट रिजर्व क्षेत्र में माइनिंग लीज देने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस अनिरुद्ध बोस व जस्टिस डीएन पटेल की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. खंडपीठ ने सरकार से पूछा कि एलिफैंट रिजर्व क्षेत्र के नो माइनिंग जोन में कैसे माइनिंग लीज दी गयी. इसे शपथ पत्र में स्पष्ट किया जाये. इस बीच माइनिंग के आगे की कार्रवाई नहीं होगी. मामले की अगली सुनवाई 12 दिसंबर को होगी.
इससे पूर्व राज्य सरकार की अोर से स्टेटस रिपोर्ट दायर किया गया, जिसे खंडपीठ ने रिकार्ड पर लिया. सरकार की अोर से अधिवक्ता अतानू बनर्जी ने खंडपीठ को बताया कि माइनिंग लीज के लिए जनवरी माह में एनआइटी का प्रकाशन किया गया था. मार्च में लीज एग्रीमेंट हुआ है.
माइनिंग के लिए इंवायरमेंटल क्लियरेंस की जरूरत होगी. क्लियरेंस लेना माइनिंग कंपनी का काम है, राज्य सरकार का नहीं. वहीं प्रार्थी की अोर से अधिवक्ता राजीव कुमार ने खंडपीठ को बताया कि सरकार ने यह जानते हुए कि वह क्षेत्र एलिफैंट रिजर्व क्षेत्र है तथा नो माइनिंग जोन में पड़ता है, इसके बावजूद सरकार ने माइनिंग लीज एग्रीमेंट किया है. इसके लिए जिम्मेवार अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए.
उल्लेखनीय है कि प्रार्थी मतलूब आलम ने जनहित याचिका दायर की है. उन्होंने भनगांव के 118 एकड़ में साउथ वेस्टर्न कंपनी को माइनिंग लीज देने को चुनाैती दी है. उधर, सुनवाई के बाद प्रार्थी के अधिवक्ता राजीव कुमार ने बताया कि कोर्ट ने भनगांव में माइनिंग कार्य पर रोक लगा दी है तथा सरकार से जवाब मांगा है.
