सीएम ने आदिवासी पारंपरिक व्यवस्था के प्रतिनिधियों को किया संबोधित, कहा, विदेशी शक्तियों के मंसूबे कामयाब नहीं होने देंगे

रांची : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि राज्य सरकार आदिवासियों की परंपरा और संस्कृति के संरक्षण के लिए कृतसंकल्पित है. विदेशी शक्तियां हमारी संस्कृति को नष्ट करने पर तुली हैं, लेकिन सरकार उनके मंसूबों को कामयाब नहीं होने देगी. हमारी परंपरा और संस्कृति को बचाये रखने वाले हमारे पारंपरिक धर्म गुरुओं को जनवरी से […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
रांची : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि राज्य सरकार आदिवासियों की परंपरा और संस्कृति के संरक्षण के लिए कृतसंकल्पित है. विदेशी शक्तियां हमारी संस्कृति को नष्ट करने पर तुली हैं, लेकिन सरकार उनके मंसूबों को कामयाब नहीं होने देगी.
हमारी परंपरा और संस्कृति को बचाये रखने वाले हमारे पारंपरिक धर्म गुरुओं को जनवरी से सम्मान राशि मिलनी शुरू हो जायेगी. विभाग से चर्चा कर उन्हें पहचान पत्र निर्गत करने की भी प्रक्रिया शुरू की जायेगी. श्री दास रविवार को मुख्यमंत्री आवास में बोकारो जिला से आये आदिवासी पारंपरिक व्यवस्था के प्रतिनिधि माझी हड़ाम, नायकी, जोगमाझी, भोदरन व कुड़ाम नायके को संबोधित कर रहे थे.
2019 से शुरू होगी ओल चिकी भाषा की पढ़ाई
उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि मातृभाषा सर्वोपरि है. सरकार इसे बढ़ावा दे रही है. हमें अपनी भाषा, सभ्यता, संस्कृति और परंपरा को छोड़ना नहीं है. 2019 से ओल चिकी भाषा में स्कूलों में पढ़ाई शुरू कर दी जायेगी.
इसके लिए किताबें छप कर आ गयी हैं. अभी पहली और दूसरी कक्षा में इसकी पढ़ाई होगी. आनेवाले दिनों में पांचवीं तक ओल चिकी भाषा में पढ़ाई होगी. स्कूलों में स्थानीय भाषा के शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया भी चल रही है. ओल चिकी के अलावा कुडुख, मुंडारी आदि भाषाओं के शिक्षकों की भी नियुक्ति की जा रही है, ताकि बच्चे अपनी भाषा में पढ़ाई कर सकें.
लुगु बुरु राजकीय मेला घोषित
प्रतिनिधियों की रजरप्पा में भवन की मांग पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वहां एक तीन मंजिला इमारत बन रही है, जहां सस्ती दर पर ठहरने व खाने की व्यवस्था रहेगी
राज्य में घेराबंदी से बचे बाकी धार्मिक व पारंपरिक स्थलों की घेराबंदी के लिए अगले साल के बजट में प्रावधान किया जायेगा. अपनी परंपरा और संस्कृति को बचाये रखने के लिए सभी को एकजुट होकर काम करना होगा. लालच, भय, अंधविश्वास आदि के चक्कर में कोई धर्म परिवर्तन नहीं कराये, इसके लिए सरकार ने कानून बनाया है. लुगु बुरु मेले को राजकीय मेला घोषित किया है. वहां टेंट सिटी का निर्माण हो रहा है, ताकि हमारे आदिवासी श्रद्धालुओं को खुले आसमान के नीचे रात न गुजारनी पड़े. वहां पानी, बिजली आदि की व्यवस्था की जा रही है.
जमशेदपुर में एक घर के अलावा कोई संपत्ति नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग ये आरोप लगाते हैं कि सरकार उनकी जमीन लूट लेगी. चार साल के शासन में एक भी इंच जमीन नहीं ली गयी है.
जो लोग आदिवासियों का शोषण करते हैं, जिन लोगों ने राज्य में हर जगह आदिवासियों की जमीन औने-पौने दाम में खरीदी है, वे ही आज हम पर आरोप लगा रहे हैं. मैं चुनौती देता हूं कि जमशेदपुर में एक घर के अलावा मेरी कोई संपत्ति बताये. 1995 से विधायक हूं, लेकिन गड़बड़ी नहीं की. वहीं हम पर आरोप लगानेवाले नेताओं में आदिवासियों की संपत्ति के लुटेरों के नाम और उनके द्वारा पूरे राज्य में अर्जित की गयी संपत्ति की सूची है. वे नहींचाहते हैं कि आदिवासियों का विकास हो. आदिवासी पढ़-लिख गये, तो इनकी वोट बैंक की राजनीति समाप्त हो जायेगी.
धर्मगुरुओं ने सीएम को माझी हड़ाम की उपाधि से किया संबोधित
कार्यक्रम के दौरान बोकारो से आये परंपरागत धर्मगुरुओं ने मुख्यमंत्री के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें राज्य के माझी हड़ाम की उपाधि से संबोधित किया. उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयास से आदिवासी परंपरा को मजबूती मिलेगी. रीति-रिवाज कायम रहेंगे. गांव की पारंपरिक प्रशासनिक व्यवस्था सुचारु रूप से चलेगी. प्रतिनिधिमंडल ने लुगु बुरू मेले को राजकीय महोत्सव के रूप में मान्यता देने पर विशेष तौर पर बधाई दी. कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता लखी हेंब्रम, आनंद मुर्मू समेत कई लोग उपस्थित थे.
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