मनोज सिंह
रांची : कोल इंडिया की अनुषंगी इकाई कोल माइंस प्लानिंग एंड डिजाइनिंग इंस्टीट्यूट (सीएमपीडीआइ) ने एंटी ब्राइबरी मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया है. इससे भ्रष्टाचार पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी.
इस सिस्टम को संस्थान आइएओ से प्रमाण पत्र लेने का प्रयास कर रहा है. कंपनी के अधिकारियों का दावा है कि अब तक किसी सार्वजनिक उपक्रम ने इस तरह का मैनेजमेंट सिस्टम डेवलप नहीं किया है. शुरुआती दौर में इस सिस्टम का उपयोग मुख्यालय में करने की योजना है. धीरे-धीरे यह कंपनी के अन्य क्षेत्रीय संस्थानों में भी लागू किया जा सकता है.
संवेदनशील पद चिह्नित
कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि भ्रष्टाचार रोकने के उद्देश्य से इसका निर्माण किया गया है. इसमें वैसे पदों को चिन्हित किया गया है, जो संवेदनशील है. इन पदों पर काम करनेवालों पर निगरानी रखने के लिए एक सिस्टम विकसित की गयी है. इसकी जानकारी उन पदों पर काम करने वाले व्यक्तियों को भी नहीं होगी. इसकी सीधे मॉनिटरिंग उच्च स्तर से होगी. इस सिस्टम को आइएसओ से निबंधन कराने का प्रयास हो रहा है.
कैसे होगी जांच
अधिकारियों ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ में कई देशों के प्रतिनिधि आपस में बातकर एक गाइड लाइन तय करते हैं. इसमें किसी भी काम करने के बेस्ट प्रैक्टिस को शामिल किया जाता है. इस बेस्ट प्रैक्टिस पर चर्चा के बाद उसे अंतिम रूप दिया जाता है. फिर किसी सर्टिफिकेशन एजेंसी को प्रमाण पत्र देने की जिम्मेदारी दी जाती है. यही एजेंसी सिस्टम की जांच करती है. इसमें हो रही गड़बड़ियों की जानकारी देती है. सब कुछ सही होने पर एजेंसी प्रमाण पत्र देती है.
37001 सर्टिफिकेट का प्रयास
सीएमपीडीआइ आएसएओ : 37001 सर्टिफिकेट के लिए प्रयास कर रहा है. इसी कोड से भ्रष्टाचार संबंधी सिस्टम को मान्यता दी जाती है. इसके लिए एजेंसियों को अधिकृत किया गया है.
सीएमपीडीआइ ने एक प्रयास किया है. मेरी जानकारी में अब तक इस तरह का सिस्टम कहीं विकसित नहीं किया गया है. इसके सर्टिफिकेशन के लिए प्रयास किया जा रहा है.
संजय दुबे, जनसंपर्क प्रमुख, सीएमपीडीआइ
