रांची : बिहार राज्य अौद्योगिक विकास निगम (बीएसआइडीसीएल) के झारखंड स्थित कारखाना कर्मियों को उनके आठ माह के बकाये वेतन का भुगतान हो सकता है. वेतन भुगतान संबंधी सहमति के लिए कारखाना प्रबंधन ने झारखंड हाइकोर्ट में अपील की है. दो नवंबर को इस संबंध में फैसला हो सकता है.
इससे पहले कोर्ट के आदेश पर निगम के पांच कारखाने के कुल 870 कर्मियों को 20 माह का वेतन भुगतान सितंबर माह में किया गया है. यदि कोर्ट ने चाहा, तो निगम के इइएफ टाटीसिलवे, हाइटेंशन इंसुलेटर, मैलुबल कास्ट आयरन व स्वर्णरेखा घड़ी कारखाना, सामलौंग तथा सुपर फास्फेट कारखाना, सिंदरी के कर्मियों को उनके अौर अाठ माह के बकाये वेतन का भुगतान हो सकता है.
गौरतलब है कि बिहार सरकार के स्वामित्व वाले बंद हो चुके इन कारखाने के कर्मियों का भुगतान 10-15 वर्षों से लंबित है. इधर झारखंड हाइकोर्ट ने बकाया वेतन भुगतान मामले की सुनवाई करते हुए निगम से झालसा के पास पैसा जमा करने को कहा था. इसके बाद जमा रकम में से सितंबर में 8.21 करोड़ का भुगतान हुआ. अभी 3.50 करोड़ रुपये शेष है. इसी रकम से आठ माह के वेतन भुगतान की बात चल रही है.
झारखंड सरकार पर है बकाया : एक ओर फंड की कमी के कारण इन कारखानों के कर्मचारियों व पदाधिकारियों को वेतन नहीं मिल रहा है. वहीं, झारखंड सरकार के पास इनका पैसा बकाया है. कर्मचारी बीमा अस्पताल (इएसआइ), नामकुम के लिए हाइटेंशन की जमीन वर्ष 1982-83 में ली गयी थी. पर इसका भुगतान करीब 35 वर्षों बाद 29 दिसंबर 2017 को किया गया, वह भी अधूरा.
राज्य सरकार ने कारखाने को 8.63 करोड़ रुपये का ही भुगतान किया था, जो जमीन की कुल लागत से करीब पांच करोड़ कम है. इस पांच करोड़ के लिए पत्राचार जारी है. उधर, टाटीसिलवे थाने के लिए दी गयी इइएफ की जमीन की लागत 28 लाख थी. पर इसका दो लाख रुपये अब भी बकाया है. इसकी मांग एसएसपी, रांची से होती रही है.
