रांची : जहां भर्ती रहते हैं गंभीर मरीज, वहीं लगा रहता है गंदे कपड़ों का अंबार

लाॅन्ड्री पर हर महीने 1.5 लाख रुपये खर्च करता है रिम्स प्रबंधन, फिर भी… रिम्स में विभिन्न वार्डों से निकलने वाली गंदी चादरों और गंदे कंबलों के रखरखाव व धुलाई सेंट्रल स्ट्रेलाइजेशन सर्विस डिपार्टमेंट (सीएसएसडी) के जिम्मे है. रिम्स प्रबंधन ने यह पूरी व्यवस्था आउटसोर्सिंग के तहत मेडी लैब को दे रखी है. इसके बावजूद […]

लाॅन्ड्री पर हर महीने 1.5 लाख रुपये खर्च करता है रिम्स प्रबंधन, फिर भी…
रिम्स में विभिन्न वार्डों से निकलने वाली गंदी चादरों और गंदे कंबलों के रखरखाव व धुलाई सेंट्रल स्ट्रेलाइजेशन सर्विस डिपार्टमेंट (सीएसएसडी) के जिम्मे है. रिम्स प्रबंधन ने यह पूरी व्यवस्था आउटसोर्सिंग के तहत मेडी लैब को दे रखी है. इसके बावजूद विभिन्न वार्डों में गंदी चादरों और गंदे कंबल को व्यवस्थित रूप से नहीं रखा जाता है. इससे उठनेवाली बदबू के कारण वार्ड में खड़ा रहना मुश्किल होता है. इन गंदी चादरों और कंबलों को समय पर हटवाने की जिम्मेदारी सिस्टर इंचार्ज की है, लेकिन वे भी ध्यान नहीं देती हैं.
रांची : रिम्स में सामान्य से लेकर महत्वपूर्ण वार्डों को मिलाकर कुल 41 वार्ड हैं. एक वार्ड में 36 बेड हैं, लेकिन वहां 55 से 60 मरीज भर्ती रहते हैं.
इन वार्डों से निकलने वाली गंदी चादरों और कंबलों को एकत्र कर इनकी धुलाई के लिए अत्याधुनिक सेंट्रल स्ट्रेलाइजेशन सर्विस डिपार्टमेंट (सीएसएसडी) को स्थापित किया गया है. सीएसएसडी के संचालन का जिम्मा मेडी लैब के पास है. इसमें 20 से 22 कर्मचारी नियुक्त हैं.
रिम्स प्रबंधन एजेंसी को प्रतिमाह करीब 1.25 लाख रुपये देता है. इसमें कर्मचारियों का वेतन व मशीनों का रखरखाव शामिल है. वार्ड में कार्यरत सिस्टर इंचार्ज की सूचना पर एजेंसी के कर्मचारी विभिन्न वार्ड से गंदी चादरों और कंबलों को एकत्रित कर सफाई के लिए ले जाते हैं. इसके बाद वापस इन्हें वार्ड में पहुंचाया जाता है. लेकिन, रिम्स में यह व्यवस्था पूरी तरह से फेल है.
न्यूरो सर्जरी, हड्डी विभाग, मेडिसिन आइसीयू, सर्जरी आइसीयू सहित अधिकांश वार्ड में एक जगह गंदी चादरें और कंबल फेंक दिये जाते है. एकत्र गंदे कपड़ों को हटाने के लिए सीएसएसडी को नर्स समय पर सूचना नहीं देती हैं. ऐसे में गंदे कपड़े कई दिनों तक वार्ड के स्टोर रूम में ही पड़े रहते हैं. एक नर्स ने बताया कि वार्ड में क्षमता से ज्यादा मरीज हैं. ऐसे में वह मरीजों की देखभाल करें या चादर को उठाने के लिए सीएसएसडी को सूचित करें.
अस्पताल में जगह-जगह दिखती है पान की पीक
अस्पताल परिसर, सीढ़ियों और कॉरिडोर में जगह-जगह पान का पीक से दीवारें लाल हो गयी हैं, लेकिन अस्पताल की सफाई का जिम्मा संभाल रही अन्नपूर्णा यूटिलिटी के कर्मचारियाें की नजर उस ओर नहीं पड़ती है. यह हाल तब है जब रिम्स प्रबंधन इस एजेंसी को अस्पताल परिसर की सफाई के लिए प्रतिमाह करीब 35 लाख रुपये देता है.
अस्पताल में प्रतिदिन ओपीडी में 1600 से ज्यादा मरीज परामर्श लेने आते हैं. वहीं, 1550 से ज्यादा मरीज वार्ड में भर्ती रहते हैं. मरीज के साथ एक से दो परिजन साथ आते हैं. यानी अस्पताल में प्रतिदिन 7,000 आदमी की आवाजाही होती है. इनमें से कई लोग अस्पताल की दीवाराें को पान का पीक से लाल कर देते हैं. रिम्स प्रबंधन ने गंदगी फैलाने वालों से जुर्माना वसूलने की सूचना भी लिखवायी है, लेकिन इसका असर नहीं पड़ता है.
वार्ड में गंदी चादर, कंबल व बेडशीट को सीएसएसडी में भिजवाने की जिम्मेदारी सिस्टर इंचार्ज की है. अगर वह ऐसा नहीं करती है, तो इसके लिए वह जिम्मेदार हैं. सीएसएसडी के कर्मचारी अगर गंदा कपड़ा नहीं उठा रहे है, तो वह जिम्मेदार है. मैं खुद मंगलवार को इसकी जानकारी लूंगा.
डॉ विवेक कश्यप, अधीक्षक, रिम्स

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