रांची : परिवार की तरह काम करें, एक दिन झारखंड स्विट्जरलैंड बन जायेगा : डॉ एमके गौतम

शहीद जतरा टाना भगत व महात्मा गांधी के सत्याग्रह-अहिंसा के दर्शन पर रखे गये विचार रांची : झारखंड को स्विट्जरलैंड बनाना है, तो खुद पर विश्वास करना होगा. सभी को एक परिवार मानना होगा. झारखंड में कई जनजातियां रहती थीं, लेकिन उनमें कोई एकता नहीं थी. बाद में जल, जंगल, जमीन को लेकर एकजुट होकर […]

शहीद जतरा टाना भगत व महात्मा गांधी के सत्याग्रह-अहिंसा के दर्शन पर रखे गये विचार
रांची : झारखंड को स्विट्जरलैंड बनाना है, तो खुद पर विश्वास करना होगा. सभी को एक परिवार मानना होगा. झारखंड में कई जनजातियां रहती थीं, लेकिन उनमें कोई एकता नहीं थी. बाद में जल, जंगल, जमीन को लेकर एकजुट होकर आंदोलन किया. आदिवासियों की भाषाअों को नकारा गया. विश्व में लगभग 3000 भाषाएं विलुप्त हो चुकी हैं. इसकी जानकारी लोगों को कम है. हिंसा-अहिंसा सदैव से रही है. सबसे अधिक सत्यता है, तो वह आदिवासियों में है. अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांत पर आज भी टाना भगत चलते हैं.
यह बातें यूरोपियन यूनिवर्सिटी (ईस्ट एंड वेस्ट) के चांसलर डॉ एमके गाैतम ने कही. वे मंगलवार को मोरहाबादी स्थित जनजातीय शोध संस्थान (टीआरआइ) के तत्वावधान में शहीद जतरा टाना भगत व महात्मा गांधी के सत्याग्रह-अहिंसा के दर्शन पर आयोजित कार्यशाला में अपने विचार रख रहे थे. मुख्य अतिथि आदिवासी विकास आयुक्त गाैरीशंकर मिंज थे.
रांची विश्वविद्यालय के डीन डॉ आइके चाैधरी ने कहा कि दुनिया में जीवन जीने का सर्वोत्तम तरीका आदिवासियों ने ढूंढ़ रखा था, जो आज भी दिखता है.
वे प्रकृति के साथ, प्रकृति के बीच रहते हैं. 1917 में महात्मा गांधी रांची आये थे. वे जिस अहिंसा के प्रयोग को अपना रहे थे, वहीं प्रयोग जतरा टाना भगत 1914 से कर रहे थे. गांधीवादी तंत्र का जन्म स्थल पहले बिहार था, अब झारखंड है. अहिंसा, सत्याग्रह की बात करनेवाले टाना भगत आज भी अपने उस सिद्धांत पर कायम हैं. उनकी कथनी व करनी में समानता है.
हिंसा से किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता : लखनऊ विवि के प्रो एपी सिंह ने कहा कि गांधी ने कहा था कि अहिंसा कायरों का हथियार नहीं है. हिंसा से किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता है.
सत्य ही यथार्थ है आैर सत्य ही सबकुछ है. इसे महात्मा गांधी ने अपने जीवन में उतारा आैर उसी पर चलते रहे. वैज्ञानिक डॉ विनोद नारायण ने कहा कि आज जतना टाना भगत की 130वीं व महात्मा गांधी की 150वीं जयंती है. महात्मा गांधी भारत के गांधी हैं, जबकि जतरा टाना भगत झारखंड के गांधी कहे जाते हैं. गांधीजी की अहिंसा का विचार आज भी काफी प्रासंगिक है.
विकास के साथ-साथ हम उसका भी विकास कर रहे हैं, जो पूरी दुनिया को समाप्त कर सकता है. जब दुनिया पर युद्ध के बादल मंडरा रहे हों, तो उस वक्त अहिंसा ही कारगर साबित होगी. आइआइटी कानपुर के प्रो विकास दुबे, भिखारी टाना भगत आदि वक्ताअों ने जतरा टाना भगत व महात्मा गांधी के अहिंसा व सत्याग्रह पर विस्तार से प्रकाश डाला.
इससे पूर्व टीआरआइ के निदेशक रणेंद्र कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विषय प्रवेश कराया. उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के विचार आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना आजादी के पहले था.
उन्होंने जतरा टाना भगत के जीवन दर्शन को अपनाने की अपील की. मंच का संचालन राजश्री प्रसाद ने किया. इस अवसर पर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ सत्यनारायण मुंडा, कुलसचिव एनडी गोस्वामी, डॉ गिरिधारी राम गाैंझू, डॉ हरि उरांव, डॉ मो अयूब, डॉ जिंदर सिंह मुंडा सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, विद्यार्थी उपस्थित थे.

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