रांची : हमें अपनी संस्कृति पर गर्व होना चाहिए : सुदर्शन भगत

करम पर विशेष डाक टिकट व आवरण का विमोचन वर्तमान में अखड़ा और धुकमुड़िया को बचाने का संकल्प लेने की जरूरत प्रकृति संरक्षण के पीछे के विज्ञान को समझने के लिए आज पूरी दुनिया की नजर आदिवासियों की ओर रांची : प्रकृति पर्व करम पर एक विशेष डाक टिकट व विशेष डाक आवरण का विमोचन […]

करम पर विशेष डाक टिकट व आवरण का विमोचन
वर्तमान में अखड़ा और धुकमुड़िया को बचाने का संकल्प लेने की जरूरत
प्रकृति संरक्षण के पीछे के विज्ञान को समझने के लिए आज पूरी दुनिया की नजर आदिवासियों की ओर
रांची : प्रकृति पर्व करम पर एक विशेष डाक टिकट व विशेष डाक आवरण का विमोचन जनजातीय शोध संस्थान सभागार में हुआ़ इस अवसर पर मुख्य अतिथि, जनजातीय मामलों के केंद्रीय राज्यमंत्री सुदर्शन भगत ने कहा कि इससे देश भर में एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रचार-प्रसार होगा़ यहां के आदिवासी व मूलवासी करम पर्व पूरे उल्लास से मनाते हैं.
प्रकृति के साथ हमारे समाज की निकटता इतनी है कि हमारी सारी पूजा पद्धतियां ही इससे जुड़ी हैं. आज प्रकृति संरक्षण को लेकर पूरी दुनिया चिंतित है़, पर इसके पीछे जो विज्ञान छिपा है, उसे समझने के लिए आज पूरी दुनिया की नजर आदिवासियों की ओर है़ हमें इस महान संस्कृति, महान पर्व पर गर्व होना चाहिए़ हम पर्व-त्योहारों के माध्यम से प्रकृति को बचायेंगे़ उन्होंने कहा कि इस पहल के लिए लिए डाक विभाग व कल्याण विभाग साधुवाद के पात्र हैं.
पद्मश्री मुकुंद नायक ने कहा कि हमें अखड़ा और धुकमुड़िया को बचाने का संकल्प लेने की जरूरत है़ कुड़ुख भाषा, व्याकरण व लोक साहित्य के विद्वान शरण उरांव ने कहा कि झारखंड में 32 जनजातियों के बीच कई त्योहार प्रचलित हैं और इन सभी त्योहारों में हमारे पुरखों ने प्रकृति संरक्षण का ही प्रयास किया है़ वे जानते थे कि यदि प्रकृति का संतुलन बिगड़ेगा, तो मानव का जीना मुश्किल हो जायेगा़
डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विवि के वीसी डॉ सत्यनारायण मुंडा ने कहा कि करम पर्व हमें बताता है कि विकास के लिए सच्चाई जानने, नैतिकता और काम करने की इच्छा की जरूरत है़ कल्याण सचिव हिमानी पांडेय ने कहा कि करम उन्हें ताजगी व शक्ति का अहसास कराता है़
मुख्य डाक महानिदेशक शशि शालिनी कुजूर ने भी विचार रखे़ बंदी उरांव व साथी कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया़ कार्यक्रम का संचालन राजश्री ने किया़ इस अवसर पर टीएसी सदस्य रतन तिर्की, जनजातीय शोध संस्थान के निदेशक रणेंद्र व बड़ी संख्या में अन्य लोग मौजूद थे़

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