रांची : प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ अजय कुमार ने कहा कि भाजपा आदिवासी समाज की विरोधी है. राज्य मेंं सब कुछ आदिवासियों के विरोध में हो रहा है. सेंटर फॉर आदिवासी रिसर्च एंड डेवलपमेंट की रिपोर्ट ने राज्य में आदिवासियों की बदतर स्थिति की पोल खोल कर रख दी है.
रिपोर्ट में 32 छात्रावासों की सर्वे रिपोर्ट जारी की गयी है. आदिवासियों के प्रति सरकार का रवैया उदासीन है. मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं. भाजपा के सांसद-विधायक एक ओर आदिवासियों की समस्याओं पर ध्यान नहीं देते, दूसरी ओर रामटहल चौधरी जैसे सांसद आदिवासी समाज को शराबी बताकर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं.
सरकार स्कूलों का विलय कर रही है. 4600 स्कूलों को इस वर्ष बंद करने के निर्णय से आदिवासी और गरीब बच्चों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा. विद्यालयों की दूरी बढ़ने से आदिवासी छात्रों के ड्रॉप-आॅउट में बढ़ोतरी हुई है. राज्य में भूख से जो मौतें हुई हैं, उसमें अधिकतर आदिवासी या दलित समाज से हैं. यह सिलसिला लगातार जारी है. बाल आश्रयों की हालत बदतर है. कई बाल गृहों में सुरक्षा कर्मी की बात तो दूर सुरक्षा चहारदीवारी भी नहीं है. कई आश्रय किराये के घर में चलाया जा रहा है. झारखंड हाइकोर्ट ने समाज कल्याण विभाग को निर्देश दिया है कि अविलंब रिमांड होम एवं बाल आश्रय गृहों में सभी पदों पर नियुक्ति करें,
अन्यथा सचिव का वेतन रोका जा सकता है. न्यायालय की टिप्पणी यह दर्शाती है कि किस तरह से राज्य सरकार का पूरा सिस्टम फेल है. पुलिस के बड़े-बड़े दावों के बाद भी रेप की घटना में बढ़ोतरी हुई है. 2018 में प्रतिमाह औसतन बलात्कार की 118 घटनाएं घट रही हैं. डॉ अजय ने कहा कि कांग्रेस के पदधारियों व जिलाध्यक्षों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने जिलों में आदिवासी छात्रावासों का भौतिक निरीक्षण कर जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपें. प्रदेश कार्यालय को रिपोर्ट एक सप्ताह में देंं. महिला कांग्रेस पदधारियों व जिलाध्यक्षों को निर्देश दिया गया है कि अपने-अपने जिलों में चलने वाले बालाश्रयों एवं नारी निकेतन का भौतिक निरीक्षण कर प्रदेश कार्यालय को रिपोर्ट दें, जिससे आंदोलन की रूप-रेखा तैयार की जा सके.
सेंटर फॉर आदिवासी रिसर्च एंड डेवलपमेंट की रिपोर्ट ने राज्य में आदिवासियों की स्थिति की पोल खोली
4600 स्कूलों को इस वर्ष बंद करने के निर्णय से आदिवासी और गरीब बच्चों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा
