रांची : बीएयू संचालित दो केवीके का प्रदर्शन बेहतर

नीति आयोग ने देश के सभी केवीके का मूल्यांकन किया, दी रिपोर्ट रांची : नीति आयोग ने हाल में भारतीय अनुसंधान संस्थान, नयी दिल्ली से वित्त संपोषित देश के सभी 639 जिलों में कार्यरत कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) का सर्वेक्षण एवं मूल्यांकन किया. इस सर्वेक्षण में केवीके के पांच जनादेशों और अन्य प्रसार गतिविधियों का […]

नीति आयोग ने देश के सभी केवीके का मूल्यांकन किया, दी रिपोर्ट
रांची : नीति आयोग ने हाल में भारतीय अनुसंधान संस्थान, नयी दिल्ली से वित्त संपोषित देश के सभी 639 जिलों में कार्यरत कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) का सर्वेक्षण एवं मूल्यांकन किया. इस सर्वेक्षण में केवीके के पांच जनादेशों और अन्य प्रसार गतिविधियों का पांच वर्षों के प्रदर्शन पर नीति आयोग ने ए,बी,सी,डी और ई की ग्रेडिंग सूची जारी कर दी है.
ग्रेडिंग में बिरसा कृषि विवि के तहत संचालित 16 केवीके में से केवीके, चतरा और केवीके, दुमका को ए श्रेणी मिली है, जबकि अन्य 14 केंद्रों में से केवीके-गढ़वा, बोकारो, चियांकी (पलामू), लातेहार, लोहरदगा, सिमडेगा, जगन्नाथपुर (पश्चिमी सिंहभूम), सरायकेला-खरसावां, दारीसाई (पूर्वी सिंहभूम), धनबाद, गिरिडीह, जामताड़ा, पाकुड़ और साहेबगंज को बी श्रेणी प्रदान की गयी है. प्रत्येक केवीके के लिए प्रौद्योगिकी आकलन और प्रदर्शन को प्रभावी ढंग से लागू करने के अलावा कृषि विकास के सशक्तीकरण पर बल दिया गया है. इस संबंध में बीएयू कुलपति डॉ परविंदर कौशल ने बताया कि केवीके में करीब 40 प्रतिशत वैज्ञानिकों एवं अन्य तकनीकी पद रिक्त होने के बावजूद केवीके द्वारा किया गया प्रदर्शन काफी अच्छा है.
राज्य के कृषि विकास में केवीके अग्रणी : कुलपति
कुलपति ने कहा कि झारखंड के सभी जिलों में विभिन्न फसलों का उत्पादन, उत्पादकता और क्षेत्र विस्तारीकरण में केवीके अग्रदूत की भूमिका निभा रहा है.
किसानों की आय दुगुनी करने में तकनीकी हस्तक्षेप एवं कौशल विकास के माध्यम से केवीके जिला स्तर पर प्रयत्नशील है. जिले में केवीके वैज्ञानिकों के तकनीकी सहयोग से भारत सरकार व झारखंड सरकार के कृषि विकास की विभिन्न योजनाओं के कार्यान्वयन और किसानों के सामाजिक व आर्थिक विकास को गति मिली है.
केवीके के पांच वर्षों (2013-14 से 2017-18) की अवधि में प्रदर्शन के बारे में कुलपति ने बताया कि बीएयू के केवीके ने कृषि परिस्थिति आधारित तकनीकी आकलन एवं मूल्यांकन क्षेत्र में 831 तकनीकी हस्तक्षेप कार्यक्रमों को लागू किया. मानव संसाधन प्रबंधन अधीन आयोजित 8316 प्रशिक्षणों में खेती से जुड़े कुल 2,52,165 किसान और फार्म महिलाएं, ग्रामीण युवक एवं युवतियों के लिए आयोजित 2375 प्रशिक्षणों में 73,268 युवक एवं युवतियां और प्रसार कर्मियों के 986 प्रशिक्षणों से 36,177 प्रसार कर्मी लाभान्वित हुए हैं.

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