पलामू के शमशेर मियां की हत्या के आरोप में निचली अदालत ने साक्ष्य के अभाव में छह को किया था बरी, तीन को सुनायी थी सजा
रांची : झारखंड हाइकोर्ट में पलामू के शमशेर मियां हत्या मामले में सजायाफ्ताअों की अोर से दायर क्रिमिनल अपील याचिका पर सुनवाई हुई. हाइकोर्ट ने ठोस साक्ष्य के अभाव में आजीवन कारावास की सजा पाये सैयद मियां, नूर हसन मियां व रमजान मियां को बरी करने का फैसला सुनाया.
इससे पूर्व प्रार्थियों की अोर से कोर्ट को बताया गया कि इस मामले में मृतक के पिता व दो भाइयों के बयान परस्पर विरोधी हैं. निचली अदालत ने कई तथ्यों पर ध्यान ही नहीं दिया. मामले में ठोस साक्ष्य का अभाव है.
उनके खिलाफ पलामू की निचली अदालत ने अक्तूबर 2004 में दोषी पाने के बाद आजीवन कारावास की सजा सुनायी थी, जबकि इसी मामले में साक्ष्य के अभाव में छह आरोपियों को बरी कर दिया था. सजा संबंधी आदेश को हाइकोर्ट में चुनाैती दी गयी थी. उल्लेखनीय है कि पलामू के बोहिता गांव में दिसंबर 1999 की रात शमशेर मियां की हत्या कर दी गयी थी. पुलिस ने इस मामले में गांव के ही नौ लोगों को आरोपी बनाया था.
