रांची : वन भूमि अतिक्रमण मामले पर पूर्व जज नहीं करेंगे झारखंड की पैरवी

रांची : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में कोलकाता हाइकोर्ट के पूर्व जज सौमित्र सेन झारखंड की पैरवी नहीं करेंगे. रामलखन सिंह बनाम राज्य सरकार के मामले की सुनवाई के क्रम में सोमवार को यह निर्णय लिया गया. मामले की सुनवाई एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता में हुई. न्यायाधिकरण के समक्ष कई […]

रांची : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में कोलकाता हाइकोर्ट के पूर्व जज सौमित्र सेन झारखंड की पैरवी नहीं करेंगे. रामलखन सिंह बनाम राज्य सरकार के मामले की सुनवाई के क्रम में सोमवार को यह निर्णय लिया गया. मामले की सुनवाई एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता में हुई. न्यायाधिकरण के समक्ष कई मामलों में राज्य सरकार की ओर से श्री सेन पैरवी कर रहे हैं.
मामले पर रामलखन सिंह की तरफ से पैरवी कर रहे वन क्षेत्र पदाधिकारी अनिल कुमार सिंह ने कोलकाता हाइकोर्ट की पैरवी पर आपत्ति दर्ज करायी. इस पर श्री सेन ने कहा कि यदि न्यायाधीकरण के समक्ष उन्हें पैरवी करने की इजाजत मिलेगी, तो वे पैरवी करेंगे़ न्यायाधीकरण ने कहा कि संवैधानिक मामले पर पैरवीकार के उपस्थित होने पर किसी तरह का निर्देश नहीं मिला है. इसलिए श्री सेन उपस्थित नहीं हो सकते हैं.
झारखंड में वनों के व्यापक अतिक्रमण से संबंधित मामले पर बरही के पूर्व विधायक रामलखन सिंह ने वनों का सर्वेक्षण सैटेलाइट से कराने की मांग की है.
न्यायाधीकरण के हस्तक्षेप के बाद राज्य सरकार ने अतिक्रमित वन भूमि को नियमित करने के लिए गैर वन भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश केंद्र को दिया है. न्यायाधीकरण ने मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. न्यायाधीकरण ने जज श्री सेन को किये गये भुगतान की वसूली संबंधित अधिकारी से करने का निर्देश भी दिया है.

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