सरना और मसना स्थल में तोड़फोड़ के विरोध में ग्रामीणों का हल्ला बोल

रांची : सेना की ओर से हुंडरू में सांस्कृतिक और पूजा स्थलों पर कब्जा किये जाने को लेकर बुधवार को ग्रामीणों ने विरोध सभा की. इसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए. ग्रामीणों ने शनिवार (23 जून) को कमांडिंग अफसर मनीष कुमार के नेतृत्व में सरना, मसना स्थल और अन्य जगहों में तोड़फोड़ किये जाने का विरोध […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

रांची : सेना की ओर से हुंडरू में सांस्कृतिक और पूजा स्थलों पर कब्जा किये जाने को लेकर बुधवार को ग्रामीणों ने विरोध सभा की. इसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए. ग्रामीणों ने शनिवार (23 जून) को कमांडिंग अफसर मनीष कुमार के नेतृत्व में सरना, मसना स्थल और अन्य जगहों में तोड़फोड़ किये जाने का विरोध किया. सरना की जमीन को सेना की जमीन घोषित किये जाने पर भी लोगों ने नाराजगी जतायी. बैठक में कई नेता भी शामिल हुए.

त्रिपक्षीय वार्ता कराने का किया गया आग्रह
सभा को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि हुंडरू मौजा के हेथू, हिनू, सतरंजी, तुपुदाना, हेसाग और कल्याणपुर की जमीन 1942 में डिफेंस इंडिया रूल्स के तहत अस्थायी रूप से सेना को ब्रिटिश शासनकाल में सौंपी गयी थी. अब तक सेना को दी गयी जमीन का विधिवत अधिग्रहण राज्य सरकार की तरफ से नहीं किया गया है. सभी जमीन के रैयत अभी भी मालगुजारी दे रहे हैं. इन जगहों पर जमीन की खरीद बिक्री भी हो रही है. लोग परंपरागत रूप से बसे हुए भी हैं. अब सेना की ओर से ग्रामीणों को अतिक्रमणकारी घोषित कर कब्जा हटाने की कोशिश की जा रही है. सभी रैयतों को अवैध कब्जा हटाने का नोटिस भी जारी किया जा रहा है.
अंचलाधिकारी की तरफ से रैयतों का म्यूटेशन रद्द कर उसे सेना को हस्तांतरित करने की कोशिश की जा रही है. वक्ताओं ने राज्य सरकार से सेना की कार्रवाई के खिलाफ ग्रामीणों की त्रिपक्षीय वार्ता कराने का आग्रह किया. सभा की अध्यक्षता प्रकाश टोप्पो ने की. विरोध सभा को महानगर कांग्रेस अध्यक्ष संजय पांडेय, कांग्रेस नेता सह पूर्व उप महापौर अजय नाथ शाहदेव, माकपा के जिला सचिव सुखनाथ लोहरा, सुभाष मुंडा, पार्षद पुष्पा तिर्की, महादेव कच्छप, रोपना पाहन, सुखदेव साहू, चेंगड़े टोप्पा, आनंद टोप्पाे, बिरसा कच्छप, सीता कच्छप, सिलवंती मिंज, महादेव तिर्की, अजय टोप्पो व राजू टोप्पो ने संबोधित किया.
सरना की जमीन को सेना की जमीन घोषित किये जाने पर भी लोगों ने नाराजगी जतायी
सभी जमीन के रैयत अभी भी मालगुजारी दे रहे हैं
अब सेना की ओर से ग्रामीणों को अतिक्रमणकारी घोषित कर कब्जा हटाने की कोशिश की जा रही है
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