प्रभात खबर से बोले राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार: दुर्भाग्य है, कट बंद करने का निर्णय मुख्यमंत्री को लेना पड़ा

भाजपा के राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार सोशल मीडिया पर चर्चा में रहते हैं. वह अपने ट्विट से व्यवस्था से लेकर कार्य प्रणाली पर कटाक्ष करते हैं. कई मसले पर सुझाव भी आते हैं. खास कर वह बुनियादी जरूरतों को लेकर टिप्पणी करते हैं. प्रभात खबर के वरीय संवाददाता सतीश कुमार ने उनसे कई मुद्दों पर […]

भाजपा के राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार सोशल मीडिया पर चर्चा में रहते हैं. वह अपने ट्विट से व्यवस्था से लेकर कार्य प्रणाली पर कटाक्ष करते हैं. कई मसले पर सुझाव भी आते हैं. खास कर वह बुनियादी जरूरतों को लेकर टिप्पणी करते हैं.
प्रभात खबर के वरीय संवाददाता सतीश कुमार ने उनसे कई मुद्दों पर बातचीत की. रांची में ट्रैफिक समस्या पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि मुख्यमंत्री को कट्स बंद करने के निर्णय में शामिल होना पड़ा. उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के काम को सराहा है. प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश.
Qआपने मुख्यमंत्री के साथ लंबे समय तक संगठन में कार्य किया है. मुख्यमंत्री के कार्यकाल के तीन साल पूरे हो रहे हैं. आप इसे कैसे देखते हैं?
जवाब : पिछले 14 साल में निर्णय लेने की सारी व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी थी. ऐसे में आपको काम करने का बहुत कम समय मिला है. इसी में आपको काम करना है. जनता को परिणाम देना है. इसके लिए जो भी परिणाम देना चाहेगा, उसे तुरंत निर्णय लेना होगा. सरकार की ओर से भी त्वरित निर्णय लिये जा रहे हैं.
Qट्रैफिक को लेकर मुख्यमंत्री की ओर से पहल की गयी है, सड़कों के कट्स बंद कराये गये. क्या लगता है कि कट्स बंद होने से ट्रैफिक समस्या का समाधान हो जायेगा?
जवाब : यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि मुख्यमंत्री को कट्स बंद करने के निर्णय में शामिल होना पड़ा. मैं मानता हूं कि हर विषय की जानकारी न तो राजनीतिज्ञ को हो सकती है और न ही प्रशासनिक अधिकारियों को. राजीव चड्डा एक जानेमाने ऑर्किटेक्ट हैं. मुझे खुशी है कि मुख्यमंत्री के आग्रह पर उन्होंने अपना सुझाव दिया है.
सुधार की प्रक्रिया सरकार को पहले अपने घर से करनी चाहिए. मॉस्टर प्लान में जहां-जहां सरकारी जमीन है, उसका उपयोग सड़क चौड़ीकरण में करना चाहिए. उदाहरण के तौर पर पुरुलिया रोड में सदर अस्पताल की जमीन का उपयोग कर सकते हैं. सुधार की यह प्रक्रिया ज्यादा स्वीकार्य होगी. इसके बाद जनता भी जमीन देने के लिए आगे आयेगी.
Qकेंद्र व राज्य में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार है. आपकी नजर में विकास कार्यों की कैसी प्रगति है?
जवाब : केंद्र व राज्य में विकास कार्य की तेजी अनुमान से बेहतर है. बड़ी बात यह है कि गोल-मटोल वायदे या योजनाएं नहीं बन रही हैं. स्पष्ट योजना पर काम हो रहा है, जिनको हम संख्या के माध्यम से आंक सकते हैं. उदाहरण के तौर पर सरकार ने 2019 तक हर घर में बिजली पहुंचाने की योजना बनायी है. पहले हर गांव में बिजली पहुंचाने की बात होती थी, जो अस्पष्ट थी. अब हम हर परिवार व गांव को जोड़ने की बात करते हैं. अब विकास के कार्य व्यक्ति व परिवार पर केंद्रित हैं.
Qट्वीटर पर आप खुल कर अपनी बात रखते हैं. इसमें आलोचना व सुझाव होते हैं, क्या वजह है कि आपको अपनी बात रखने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ता है? क्या सरकार में जनप्रतिनिधियों को नहीं सुनी जा रही है?
जवाब : मैं अपनी बात कहने के लिए ट्विट को एक माध्यम की तरह इस्तेमाल करता हूं. यह मेरे निजी विचार हैं. विभिन्न स्रोत से मिलनेवाली जानकारी को इसके माध्यम से बांटने का काम करते हैं. मैं सितंबर 2016 से सरकार को बता रहा हूं कि सोलर पावर की दर सस्ती हो रही है, इस पर किसने कितना संज्ञान लिया, यह मूलत: अधिकारियों पर निर्भर है. पर दुखद है कि यह मामला अब कोर्ट में पहुंच गया है.
इसे मैं सुझाव मानता हूं, आलोचना नहीं. मेरी हर बात से सरकार सहमत हो यह जरूरी नहीं है. पर सरकार का निर्णय अंतिम है. इसके लिए वह अधिकृत है. जहां तक जनप्रतिनिधियों की बात नहीं सुने जाने का सवाल है, मुझे लगता है कि कहीं न कहीं अधिकारी जनप्रतिनिधियों को संतुष्ट नहीं कर पा रहे हैं. जनप्रतिनिधियों के सुझाव पर विचार होने चाहिए.
Qआप काफी समय से संगठन से जुड़े रहे हैं. अब सांसद का दायित्व निभा रहे हैं. दोनों की कार्यप्रणाली को आप कैसे देखते हैं?
जवाब : संगठन व संसद की कार्यप्रणाली बिल्कुल भिन्न है. संसद के कार्य नियम व कानून के तहत होते हैं. इसका लिखित कानून है. जबकि, पार्टी व संगठन के काम में सामान्य ज्ञान व सूझबूझ की जरूरत होती है. हमें परिवार, व्यापार, संगठन व जनता के साथ सामंजस्य बैठा कर काम करना पड़ता है. प्राथमिकता के आधार पर हम अपना दायित्व निभाते हैं.
Qप्रधानमंत्री भी कह रहे हैं कि अगला चुनाव मोबाइल पर होगा. आप भी ट्वीटर पर काफी सक्रिय हैं, इसकी क्या वजह है?
जवाब : यह स्पष्ट है कि अगले चुनाव में तकनीक का पूरा उपयोग होगा. इसमें कोई पार्टी पीछे नहीं रहेगी. पिछले चुनाव में अन्य दलों की तुलना में भाजपा सोशल मीडिया में आगे थी. यह एक ऐसा माध्यम है, जो सरल व कम खर्चीला है. साथ ही पेचिदा भी नहीं है. देश में युवाओं की संख्या काफी ज्यादा है. यह उन तक पहुंचने का सशक्त माध्यम है.
Qआपने भी तीन आदर्श ग्राम का चयन किया है. क्या आप यहां हो रहे कार्य से संतुष्ट हैं?
जवाब : आदर्श ग्राम में सांसद का रोल फैसिलिटेटर का होता है. यहां पर सरकार को काम करना है. केंद्र व राज्य सरकार की योजनाएं यहां लागू हो, यह हमारी जिम्मेवारी है. यह प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना है. मुझे लगता है कि वर्ष 2018-19 में कभी न कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम इन गांवों की प्रगति का आकलन करेगी. तब यह स्पष्ट हो जायेगा कि राज्य सरकार ने इन गांवों को कितनी प्राथमिकता दी है.
Qराज्यसभा में अब तक का आपका अनुभव कैसा रहा है?
जवाब : राज्यसभा में मेरा लगभग डेढ़ साल कार्यकाल पूरा हुआ है. संसद में मेरी उपस्थिति शत प्रतिशत है. मैंने 100 से अधिक सवाल उठाये. कई डिबेट में हिस्सा लिया. कुल मिला कर नये सदस्य के तौर पर मैं अपने काम को संतोषजनक मानता हूं.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >