ग्रामीण : चार तरह के जानवर हैं क्षेत्र में वन विभाग : 200 तरह के जीव-जंतु हैं
रांची : गांव वाले कहते हैं कि बड़कागांव व केरेडारी के माइंस इलाके में सिर्फ चार ही तरह के जंगली जानवर हैं. इसमें सियार, खरगोश, गिलहरी और सांप हैं. हालांकि वन विभाग इस इलाके में भेड़िया, लकड़बग्घा, हाथी सहित करीब 200 तरह के जीव-जंतु होने का दावा करता है. साथ ही जंगली जानवरों द्वारा अनाज […]
रांची : गांव वाले कहते हैं कि बड़कागांव व केरेडारी के माइंस इलाके में सिर्फ चार ही तरह के जंगली जानवर हैं. इसमें सियार, खरगोश, गिलहरी और सांप हैं. हालांकि वन विभाग इस इलाके में भेड़िया, लकड़बग्घा, हाथी सहित करीब 200 तरह के जीव-जंतु होने का दावा करता है. साथ ही जंगली जानवरों द्वारा अनाज और मकान को नुकसान पहुंचाने के एवज में मुआवजा भुगतान का आंकड़ा भी पेश करता है. एनटीपीसी के कोयला खनन क्षेत्र के इस इलाके में जंगली जानवरों के मामले में विवाद कायम है.
एनटीपीसी कोल माइंस मामले में संबंधित क्षेत्र की वन प्रबंध समितियों ने खनन के मुद्दे पर अपनी सहमति दी है. वन प्रबंध समिति द्वारा जारी सहमति पत्र में यह कहा गया है कि वहां जंगली जानवरों के नाम पर सिर्फ सियार, खरगोश, गिलहरी और सांप हैं. संबंधित क्षेत्र में जानवरों के मामले में वन विभाग द्वारा जारी सूची में करीब 200 तरह के जंगली जीव-जंतु का उल्लेख है. वन विभाग की इस सूची में संबंधित क्षेत्र में लकड़बग्घा, भेड़िया, हाथी, चीतल, नीलगाय के अलावा विभिन्न प्रकार की चिड़िया, सांप आदि शामिल हैं.
वन विभाग ने इन जंगली जानवरों द्वारा ग्रामीणों के मकान और अनाज के भंडार को नुकसान पहुंचाने के एवज में मुआवजे का भुगतान भी किया है. विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2015-106 में इस क्षेत्र में जंगली जानवरों द्वारा पहुंचाये गये नुकसान के लिए मुआवजा के तौर पर 12.65 लाख रुपये का भुगतान किया गया.
इसमें से 6.70 लाख रुपये का मुआवजा संबंधित क्षेत्र में जंगली जानवरों द्वारा मकान को नुकसान पहुंचाने और 5.95 लाख रुपये ग्रामीणों द्वारा रखे गये अनाज को नुकसान पहुंचाने के बदले किया गया है. वर्ष 2014-15 में भी मकानों के नुकसान के बदले 7.33 लाख और अनाज के नुकसान के बदले 3.34 लाख रुपये बतौर मुआवजा दिया गया. 2009-10 में जंगली जानवरों द्वारा एक व्यक्ति के मारे जाने और 2010-12 में लोगों को घायल करने के बदले मुआवजे का भुगतान किया गया.
