मौसम की बेरुखी से परेशान है कुम्हार परिवार

त्योहारों का मौसम आते ही कुम्हार परिवारों में काम की रौनक लौटनी चाहिए थी

फोटो फाइल संख्या 6 कुजू: धूप में सुखाने के लिए रखे दीये, 6 कुजू ए: दिया बनाता कुम्हार, 6 कुजू बी: बेचने के लिए सड़क किनारे रखे समान धनेश्वर प्रसाद / प्रदीप यादव कुजू. त्योहारों का मौसम आते ही कुम्हार परिवारों में काम की रौनक लौटनी चाहिए थी, लेकिन इस बार मौसम की बेरुखी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. लगातार बारिश और धूप की कमी के कारण मिट्टी सूख नहीं पा रही, जिससे दीये, कलश, सुराही और अन्य मिट्टी के उत्पाद समय पर तैयार नहीं हो पा रहे हैं. भरेचनगर स्थित एनएच-33 किनारे बसे कुम्हारों का दीपावली और छठ पूजा से पहले का सारा काम प्रभावित हो गया है. जो दीये बन रहे हैं, वे सूखने से पहले ही फट जा रहे हैं. रोजी-रोटी पर पड़ेगा असर दीपावली में मिट्टी के दीयों और छठ पूजा में घाट पर उपयोग होने वाले कलश व सुराही की मांग सबसे अधिक होती है. ऐसे में अगर उत्पादन अधूरा रह गया, तो इन परिवारों की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ेगा. दिलीप, किसुन, विमल, देवनारायण, शंकर और कैलाश प्रजापति जैसे कुम्हारों का कहना है कि पूरे साल की कमाई इन्हीं दो त्योहारों पर निर्भर करती है. इस बार मौसम की मार से उनकी उम्मीदें टूटती दिख रही हैं. बीते वर्षों में स्वदेशी उत्पादों के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ी है, जिससे मिट्टी के सामान की बिक्री में सुधार हुआ है, लेकिन हर साल मौसम की करवट के साथ कुम्हारों की परेशानी भी बढ़ जाती है. ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह इन परिवारों के लिए वैकल्पिक सुखाने की व्यवस्था करे जैसे सोलर ड्रायर, शेडेड ड्राई ज़ोन या सामूहिक भट्टियां, ताकि वे समय पर उत्पाद तैयार कर सकें और बाजार में उपलब्ध करा सकें. यह सिर्फ आजीविका का सवाल नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत को बचाने की भी ज़िम्मेदारी है. कुम्हारों को मिले वैकल्पिक व्यवस्था चाइनीज सामान की खरीदारी न कर स्वदेशी सामान के इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार काफी गंभीर रही है. जिसको लेकर बीते वर्षों में लोगों के अंदर काफी सजगता आयी है. साथ ही साथ कुम्हार परिवार द्वारा बने सामानों की खरीदारी की बिक्री बढ़ी है. लेकिन हर वर्ष मौसम के करवट लेने के साथ कुम्हार परिवार की बेचैनी बढ़ जाती है. ऐसे में सरकार को इन कुमार परिवारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनानी चाहिए, ताकि वे त्योहारों में मिट्टी के बर्तनों को सूखाने के साथ समय पर बाजारों में लोगों के लिए मिट्टी के समान को उपलब्ध करा पायें.

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Author: VIKASH NATH

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