गाद से घट गया पतरातू डैम जलस्तर, मरम्मत और सफाई की बढ़ी जरूरत

Ramgarh News: रामगढ़ के पतरातू डैम में बढ़ते गाद जमाव से जल भंडारण क्षमता प्रभावित हो रही है. स्थानीय लोगों ने डीसिल्टिंग और मरम्मत कार्य की मांग उठाई है. यह डैम पीटीपीएस, उद्योगों और हजारों लोगों की जलापूर्ति का प्रमुख स्रोत बना हुआ है. इससे भी जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

पतरातू से अजय तिवारी की रिपोर्ट

Ramgarh News: तीन ओर पहाड़ियों से घिरा पतरातू डैम पिछले छह दशक से क्षेत्र की जलापूर्ति व्यवस्था का प्रमुख आधार बना हुआ है. लेकिन समय के साथ डैम में बढ़ते गाद जमाव ने इसकी जल भंडारण क्षमता पर असर डालना शुरू कर दिया है. स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते डैम की व्यापक सफाई और मरम्मत नहीं कराई गई तो भविष्य में जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.

1960-70 के दशक में हुआ था निर्माण

जानकारी के अनुसार पतरातू डैम का निर्माण वर्ष 1960-70 के दशक में नलकारी नदी पर किया गया था. उस समय इसकी जल संग्रहण क्षमता 1332 आरएल निर्धारित की गई थी. वर्तमान में डैम का जलस्तर 1321 आरएल पर बताया जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार जमा हो रही गाद के कारण डैम की वास्तविक जल भंडारण क्षमता धीरे-धीरे कम होती जा रही है.

पहाड़ियों से बहकर डैम में पहुंच रही भारी मात्रा में गाद

बरसात के दिनों में आसपास की पहाड़ियों से तेज बहाव के साथ मिट्टी और अवसाद बड़ी मात्रा में डैम में पहुंचते हैं. वर्षों से जमा होती इस गाद ने डैम के तल को प्रभावित किया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमित रूप से डीसिल्टिंग यानी गाद निकासी का कार्य नहीं होने से जल संग्रहण क्षमता लगातार घट रही है. विशेषज्ञों के अनुसार यदि डैम की तलहटी में जमा गाद को समय-समय पर नहीं हटाया गया तो भविष्य में बरसात के दौरान अतिरिक्त पानी संग्रहित करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. इसका सीधा असर क्षेत्र की जलापूर्ति व्यवस्था पर पड़ेगा.

निर्माण के बाद नहीं हुई बड़े स्तर पर सफाई

बताया जाता है कि डैम निर्माण के बाद से अब तक बड़े पैमाने पर इसकी सफाई और मरम्मत का कार्य नहीं कराया गया है. हालांकि पतरातू ताप विद्युत स्टेशन यानी पीटीपीएस के संचालन काल में आवश्यकता के अनुसार छोटे स्तर पर रखरखाव का काम किया जाता था. वर्तमान में पीटीपीएस की शेष परिसंपत्तियों की देखरेख कर रहे अधिकारियों ने डैम की सफाई और मरम्मत को लेकर जल संसाधन विभाग को प्रस्ताव भेजा है. अधिकारियों का कहना है कि डैम की उपयोगिता को बनाए रखने के लिए अब व्यापक स्तर पर कार्य कराना जरूरी हो गया है.

कई संस्थानों की जलापूर्ति का मुख्य स्रोत

पतरातू डैम का निर्माण मूल रूप से पीटीपीएस पावर प्लांट के लिए किया गया था. बाद में यह डैम पूरे क्षेत्र की जलापूर्ति व्यवस्था का अहम केंद्र बन गया. वर्तमान में पीटीपीएस आवासीय क्षेत्र, सिख रेजीमेंट रामगढ़, सीसीएल के बरका-सयाल क्षेत्र, जिंदल स्टील और पीवीयूएनएल पावर प्लांट को भी इसी डैम से पानी उपलब्ध कराया जाता है. इसके अलावा हजारों स्थानीय लोग भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इसी डैम पर निर्भर हैं. ऐसे में डैम की जल भंडारण क्षमता बनाए रखना बेहद जरूरी माना जा रहा है.

पर्यटन केंद्र के रूप में भी बढ़ी पहचान

करीब तीन वर्ष पूर्व झारखंड पर्यटन विभाग ने डैम के किनारे लेक रिजॉर्ट का निर्माण कराया था. इसके बाद पतरातू डैम क्षेत्र प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में उभरकर सामने आया है. प्रतिदिन बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं. पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने के साथ डैम की सुरक्षा और संरचनात्मक मजबूती को लेकर भी चिंता बढ़ी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते डैम की मरम्मत और सफाई नहीं कराई गई तो भविष्य में इसकी संरचना पर भी असर पड़ सकता है.

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डीसिल्टिंग और मरम्मत की उठी मांग

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से जल्द व्यापक स्तर पर डीसिल्टिंग और मरम्मत कार्य शुरू कराने की मांग की है. उनका कहना है कि यह डैम न केवल क्षेत्र की जलापूर्ति बल्कि औद्योगिक और पर्यटन गतिविधियों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है. लोगों का मानना है कि यदि समय रहते गाद निकासी और संरचनात्मक मरम्मत नहीं कराई गई तो आने वाले वर्षों में डैम की क्षमता और अधिक घट सकती है, जिससे जल संकट की समस्या गंभीर रूप ले सकती है.

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लेखक के बारे में

Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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