न्यूनतम मजदूरी को लेकर श्रम अधीक्षक सख्त, फैक्ट्री प्रबंधन व ठेकेदार को नोटिस देने की तैयारी

न्यूनतम मजदूरी को लेकर श्रम अधीक्षक सख्त, फैक्ट्री प्रबंधन व ठेकेदार को नोटिस देने की तैयारी

गिद्दी. रामगढ़ जिले के हेसला स्थित झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड में छह अप्रैल को हुए भट्टी ब्लास्ट हादसा के बाद फैक्ट्री में मजदूरों के शोषण का मामला सामने आया है. मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी नहीं देने के आरोप को गंभीरता से लेते हुए श्रम अधीक्षक ने कड़ा रुख अपनाया है. रामगढ़ जिला के श्रम अधीक्षक अनिल कुमार रंजन ने झारखंड इस्पात फैक्ट्री प्रबंधन व ठेकेदार श्रीनिवास चौधरी को नोटिस जारी करने का निर्णय लिया है. उनका कहना है कि मजदूरों के वेतन व ठेका प्रणाली की पूरी जांच की जायेगी. यदि आरोप सही पाये गये, तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जायेगी. हादसे के बाद घायल मजदूर सुरेश बेदिया ने आरोप लगाया है कि उन्हें निर्धारित न्यूनतम मजदूरी नहीं दी जाती है. भुगतान करने में विलंब किया जाता है. उन्होंने यह बात पिछले दिन रांची में श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव से कही थी. अन्य मजदूरों ने भी बताया था कि उन्हें ठेकेदार श्रीनिवास चौधरी के माध्यम से पिंटू द्वारा मजदूरी का भुगतान किया जाता है. मजदूरों से लगातार 12-12 घंटे तक काम लिया जाता है. ओवरटाइम व छुट्टी नहीं दी जाती है. मजदूरों ने भुगतान व्यवस्था पर भी गंभीर आरोप लगाया है. उनका कहना है कि जिन मजदूरों ने अपना बैंक खाता विवरण दिया है, उन्हें मजदूरी सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है. जिनके पास बैंक खाता नहीं है, उन्हें नकद भुगतान किया जाता है. जानकार सूत्रों का मानना है कि इस तरह की मिश्रित भुगतान व्यवस्था श्रम नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा करती है. इसकी जांच जरूरी है. हादसा के बाद ठेकेदार श्रीनिवास चौधरी, मैनेजर सुनील राय व पिंटू मजदूरों का फोन नहीं उठा रहे है.

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By SAROJ TIWARY

SAROJ TIWARY is a contributor at Prabhat Khabar.

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