लगभग काम पूरा, फिर भी क्यों अटका है 60 KM का भारतमाला एक्सप्रेस-वे? जानिए कब दौड़ेंगे वाहन

भारतमाला परियोजना के तहत जैनामोड़ से ओरमांझी तक बन रहे फोरलेन एक्सप्रेस-वे का काम अंतिम चरण में है. 2027 तक रांची, रामगढ़ और बोकारो की कनेक्टिविटी सुधरेगी.

गोला. जैनामोड़ से ओरमांझी तक बन रही भारतमाला परियोजना अब निर्माण के अंतिम चरण में पहुंच गयी है. इस फोर लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का अधिकांश हिस्सा बनकर तैयार हो चुका है. करीब 85 से 90 प्रतिशत काम पूरा होने के बावजूद कुछ स्थानों पर जमीन अधिग्रहण, वन स्वीकृति, अंडरपास, सर्विस रोड और चेंज ऑफ स्कोप से जुड़े कार्य लंबित हैं. इन कार्यों के कारण पूरी परियोजना के निर्धारित समय पर शुरू होने को लेकर संशय बना हुआ है. हालांकि, शेष कार्यों को समय पर पूरा किया गया तो दिसंबर 2026 से मार्च 2027 के बीच सड़क को पूरी तरह यातायात के लिए खोलने की संभावना है.

परियोजना पर करीब 2,224 करोड़ रुपये होंगा खर्च

60 किलोमीटर का बनेगा फोरलेन एक्सप्रेस-वे भारतमाला परियोजना के तहत ओरमांझी से गोला होते हुए जैनामोड़ तक लगभग 60 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जा रहा है. इसका ओरमांझी-गोला खंड करीब 27.846 किलोमीटर तथा जैनामोड़-गोला खंड करीब 32.16 किलोमीटर का है. परियोजना पर करीब 2,224 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. सड़क के निर्माण से रांची, रामगढ़ और बोकारो जिले के बीच सीधा और तेज संपर्क स्थापित होगा. एनएचएआई की निगरानी में चल रही इस परियोजना के अधिकांश हिस्से में सड़क, पुल-पुलिया और अन्य संरचनाओं का निर्माण पूरा किया जा चुका है.

इन स्थानों पर अभी बाकी है काम

परियोजना के कई हिस्सों में अभी निर्माण कार्य पूरा होना बाकी है. गोला-जैनामोड़ खंड में चोपादारु, चक्रवाली और हेमतपुर के आसपास कुछ काम लंबित हैं. वहीं गोला-ओरमांझी खंड में सोटय और कुल्ही चौक के आसपास भी निर्माण कार्य जारी है. कुछ स्थानों पर स्थानीय जरूरतों के अनुसार अंडरपास और सर्विस रोड को लेकर अतिरिक्त कार्य जोड़े गये हैं. कुल्ही क्षेत्र में स्थानीय लोगों की मांगों के अनुरूप सड़क संपर्क और अंडरपास से जुड़े प्रावधानों को लेकर भी स्वीकृति मिल चुका है.

सिकिदरी क्षेत्र में भौगोलिक चुनौती

ओरमांझी और गोला के बीच सिकिदरी घाटी का क्षेत्र निर्माण एजेंसी के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है. पहाड़ी और घाटी वाले भूभाग में मिट्टी कटाई, सुरक्षा दीवार और सड़क को सुरक्षित बनाने के लिए अतिरिक्त तकनीकी कार्य करने पड़े हैं. कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां निर्माण की गति मैदानी क्षेत्रों की अपेक्षा धीमी रही. अब इस हिस्से का काम भी अंतिम चरण में बताया जा रहा है.

हाथियों के लिए बनेगा एलिफेंट कॉरिडोर

परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू वन्यजीव संरक्षण भी है. चोपादारु से हेमतपुर के बीच वन क्षेत्र से संबंधित स्वीकृति के साथ एलिफेंट कॉरिडोर विकसित किया जाना है. हाथियों के सुरक्षित आवागमन को ध्यान में रखते हुए अंडरपास और अन्य विशेष संरचनाओं का प्रावधान किया जा रहा है. रामगढ़ क्षेत्र में लगातार जंगली हाथियों की आवाजाही को देखते हुए यह व्यवस्था स्थानीय लोगों और वन विभाग के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इससे हाईवे निर्माण के साथ वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.

चेंज ऑफ स्कोप ने बढ़ायी समय सीमा

परियोजना के दौरान कई स्थानों पर स्थानीय परिस्थितियों और तकनीकी जरूरतों के अनुसार अतिरिक्त निर्माण कार्य जोड़ना पड़ा. इसे चेंज ऑफ स्कोप के तहत शामिल किया गया. इससे मूल योजना में कई अतिरिक्त कार्य जुड़े और निर्माण की समय सीमा प्रभावित हुई. जमीन, वन स्वीकृति और स्थानीय स्तर पर अंडरपास तथा सर्विस रोड की मांगों के कारण भी कुछ स्थानों पर काम की गति धीमी हुई. लंबित स्वीकृतियों और अतिरिक्त कार्यों के पूरा होने के बाद परियोजना के अंतिम रूप से चालू होने का रास्ता साफ होगा.

रामगढ़ और बोकारो के बीच आवागमन होगी काफी आसान

तीन जिलों की बदलेगी कनेक्टिविटी भारतमाला एक्सप्रेस-वे चालू होने के बाद रांची, रामगढ़ और बोकारो के बीच आवागमन काफी आसान होने की उम्मीद है. वर्तमान में रांची से बोकारो जाने में चार से पांच घंटे लगते हैं. नयी फोरलेन सड़क से यात्रा का समय घटकर करीब डेढ़ से दो घंटे होने की संभावना है. इससे आम यात्रियों के साथ व्यवसायियों और मालवाहक वाहनों को भी लाभ मिलेगा. सड़क के दोनों ओर प्रस्तावित सर्विस रोड से स्थानीय गांवों के लोगों को भी सुविधा होगी और मुख्य हाईवे पर अनावश्यक स्थानीय यातायात का दबाव कम होगा.

30 से अधिक गांवों की जमीन प्रभावित

इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण में रांची, रामगढ़ और बोकारो जिले के 30 से अधिक गांवों की जमीन किसी न किसी रूप में प्रभावित हुई है. ओरमांझी-गोला खंड में पेटरवार, चोपादारु, चक्रवाली, मगनपुर, सोसोकला, हेमतपुर, डभातू, कोइया, बरियातू, बयांग, कुल्ही, तापे, पालू, कोवालू, कुरुम, चेतनबारी, गुडू, पांचा, रोला, केटे, लोटवा, खुदिया, उपर नगड़ू, हेठ नगड़ू, चाड़ू, रोहनडीह और जोबला सहित अन्य गांव शामिल हैं.

व्यापार और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

एक्सप्रेस-वे शुरू होने के बाद जैनामोड़-गोला-ओरमांझी मार्ग पर परिवहन व्यवस्था मजबूत होगी. कृषि उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में समय कम लगेगा. स्थानीय बाजारों, व्यापारिक गतिविधियों और छोटे उद्योगों को भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद है. बेहतर सड़क संपर्क से नए व्यवसाय और रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है.

मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद

परियोजना से जुड़े लंबित कार्यों को देखते हुए अब सबकी निगाहें निर्माण की अंतिम समय सीमा पर टिकी हैं. संशोधित समय-सीमा के अनुसार मार्च 2027 तक परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. यदि लंबित जमीन, वन स्वीकृति, अंडरपास, सर्विस रोड और चेंज ऑफ स्कोप से जुड़े कार्य समय पर पूरे हो जाते हैं, तो दिसंबर 2026 से मार्च 2027 के बीच इस महत्वपूर्ण सड़क को पूरी तरह यातायात के लिए खोलने की संभावना है. इसके चालू होने से तीन जिलों की कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ क्षेत्र के विकास को भी नयी गति मिलने की उम्मीद है.


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लेखक के बारे में

By Raj Kumar

राज कुमार पिछले 20 वर्षों से प्रिंट मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं. राजनीति, सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ जनसरोकारों, स्थानीय मुद्दों और क्षेत्र की ज्वलंत समस्याओं पर समाचार संकलन में उनकी विशेष रुचि रही है. ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से सामने लाना उनकी पत्रकारिता की खास पहचान है. तथ्यपरक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी रिपोर्टिंग के माध्यम से वे क्षेत्र की वास्तविक तस्वीर को पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं.

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