उरीमारी उत्क्रमित मध्य विद्यालय में 24 दिन से मध्याह्न भोजन बंद है. प्रधानाध्यापक कह रहे हैं कि पैसे नहीं. वहीं, बीइइओ ने कहा कि बड़कागांव प्रखंड में 10 दिन से चावल पड़ा है.
उरीमारी : हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड अंतर्गत उरीमारी के दियांटोला उत्क्रमित मध्य विद्यालय में 24 दिन से मध्याह्न भोजन नहीं बन रहा है. स्कूल में 161 बच्चे पढ़ते हैं. इनमें 90 फीसदी से अधिक आदिवासी बच्चे हैं. मध्याह्न भोजन नहीं मिलने की वजह से बच्चे स्कूल नहीं जा रहे. इलाके के लोगों ने मध्याह्न भोजन के कारण ही इस स्कूल में बच्चों का नामांकन करवाया था.
विद्यालय के प्रधानाध्यापक मोती गंझू ने बताया कि 21 फरवरी से जिला से मध्याह्न भोजन के लिए राशि उपलब्ध नहीं होने के कारण बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है.
बुधवार को पूर्वाह्न 11:55 बजे स्कूल में ताला बंद हो गया था. बताया गया कि प्रधानाध्यापक चावल लाने गये हैं. चूंकि स्कूल में मध्याह्न भोजन नहीं मिलता, समय से पहले बच्चों की छुट्टी कर दी जाती है.
ज्ञात हो कि स्कूल सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक संचालित होते हैं. आदिवासी विस्थापित नेता गहन टुडू ने स्कूल में मध्याह्न भोजन नहीं मिलने को दुखद बताया.
चावल उपलब्ध है : बीइइओ
इस संबंध में पूछे जाने पर बड़कागांव प्रखंड के बीइइओ गोविंद शर्मा ने कहा कि मुख्यालय में चावल उपलब्ध है. जिला शिक्षा पदाधिकारी को स्टॉक के बाबत जानकारी दी गयी थी. पूरे प्रखंड के लिए 543 क्विंटल चावल मांगा गया था. इसके एवज में खाद्य निगम ने 273 क्विंटल चावल उपलब्ध कराया है. वितरण भी शुरू कर दिया गया है. लेकिन, कोई लेने नहीं आया. दो मार्च को गुरु गोष्ठी में प्रधानाध्यापक को इस बाबत जानकारी दी गयी थी.
मोबाइल पर भी संपर्क किया गया, लेकिन उनका मोबाइल बंद था. बीआरपी-सीआरपी के माध्यम से भी जानकारी भेजी गयी. उन्होंने कहा कि बच्चों को भोजन नहीं मिलना गलत बात है. पूरे मामले की जांच करवा कर कार्रवाई की जायेगी. बताया कि स्टॉक खत्म होने के 10 दिनों पूर्व सूचित करना है, लेकिन अब तक प्रधानाध्यापक ने कोई सूचना नहीं दी है.
