फरजी बिल भुगतान मामले में दो पर केस

कार्रवाई. रांची से विजिलेंस अफसरों की दो सदस्यीय टीम पहुंची, जांच की सीसीएल में संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है. जांच के बाद विजिलेंस की टीम कई फाइलें अपने साथ ले गयी. फरजीवाड़ा रोकने के लिए जीएम ने फरमान जारी किया है. भुरकुंडा/उरीमारी : सीसीएल बरका-सयाल क्षेत्र की भुरकुंडा परियोजना से […]

कार्रवाई. रांची से विजिलेंस अफसरों की दो सदस्यीय टीम पहुंची, जांच की
सीसीएल में संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है. जांच के बाद विजिलेंस की टीम कई फाइलें अपने साथ ले गयी. फरजीवाड़ा रोकने के लिए जीएम ने फरमान जारी किया है.
भुरकुंडा/उरीमारी : सीसीएल बरका-सयाल क्षेत्र की भुरकुंडा परियोजना से पास होने के लिए एएफएम कार्यालय पहुंचा फरजी बिल मामले में आरोपी संवेदक अशोक कुमार सिंह व वर्मा कंस्ट्रक्शन के खिलाफ सीसीएल प्रबंधन ने भुरकुंडा थाना में केस दर्ज करा दिया है.
एएफएम कार्यालय के लिपिक जयेंद्र कुमार व राजेश कुमार सिंह ने क्रमश: वर्मा कंस्ट्रक्शन व अशोक कुमार सिंह पर विपत्र लेकर फरार होने का आरोप लगाया है. दोनों लिपिकों ने आरोप लगाया है कि संबंधित संवेदकों से उन लोगों का जान का खतरा है. इधर, फरजीवाड़ा मामले की जांच विजिलेंस ने गुरुवार से शुरू कर दी है. जांच के लिए रांची से दो सदस्यीय विजिलेंस अधिकारियों की टीम बरका-सयाल एरिया मुख्यालय पहुंची. यहां पर फरजीवाड़ा से संबंधित जानकारी एकत्र करने के बाद टीम सीधे भुरकुंडा परियोजना कार्यालय गयी.
यहां करीब दो घंटे तक पीओ समेत कई अधिकारी व कर्मचारियों से बिंदुवार जानकारी एकत्र की. हालांकि पूछताछ में सभी लोग अपनी संलिप्तता से इनकार करते रहे. बिल में अंकित हस्ताक्षर से पीओ, परियोजना के वित्त अधिकारी, अभियंता, सुपरवाइजर सहित सभी लोगों ने इनकार किया है.
डिस्पैच नंबर के भी फरजी होने की बात कही गयी. लेकिन विजिलेंस की टीम अधिकारियों व कर्मचारियों की उक्त दलील से सहमत नहीं दिखी. टीम ने इससे संबंधित फाइलों को खंगाला और कुछ संबंधित फाइलें अपने साथ जांच के लिए लेकर चली गयी. विजिलेंस अधिकारी एके सिंह ने सीसीएल के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत मामले पर वे चुप्पी साध गये.
अपने एरिया में फरजीवाड़ा रोकने के लिए प्रक्षेत्र के जीएम प्रकाश चंदा ने महत्वपूर्ण कदम के तहत एक कार्यालय आदेश निकाला है. इसके तहत अब से किसी तरह का भी कोई भी पेपर बिना पीयून बुक में अंकित हुए किसी भी टेबुल पर नहीं पहुंचेगा. उन्होंने पत्र जारी कर इसे कड़ाई से लागू करने की बात कही है.
पूर्व में कई तरह का महत्वपूर्ण पेपर हैंड टू हैंड अधिकारियों व कर्मचारियों के टेबुल तक पहुंच जाता था. इसी तरह का आदेश एएफएम ने भी निकाला है. इसमें बताया है कि अब से बिल, कंक्रेंस व टीसीआर हैंड टू हैंड जमा नहीं लिया जायेगा. अधिकारियों के इस आदेश के बाद पूरे प्रक्षेत्र में हड़कंप है.
तय माना जा रहा है कि अब यहां लूट की संस्कृति नहीं चल सकेगी. जीएम ने बताया कि पूरे मामले की जानकारी सीसीएल मुख्यालय को दे दी गयी है. जांच के बाबत पूछे जाने पर कहा कि विजिलेंस जांच शुरू हो गयी है. इधर, गुरुवार को एएफएम समेत कई अधिकारियों के साथ जीएम की महत्वपूर्ण बैठक भी हुई. इसमें जीएम ने अधिकारियों को भविष्य में विशेष सावधानी बरतने का निर्देश दिया है.
पेपर लेकर भागा, तो बढ़ा शक
एएफएम कार्यालय के अधिकारी द्वारा जब संबंधित संवेदक से 50 हजार से अधिक का बिल होने संबंधित मामले में पूछताछ के दौरान संवेदक से महाप्रबंधक के सैंक्शन लेटर की मांग की थी. इसके बाद संवेदक वहां से पेपर लेकर भाग निकला. इसके बाद अधिकारी का शक और गहरा गया.
पहले भी हो चुका है फरजीवाड़ा
सीसीएल बरका-सयाल में इस तरह का फरजीवाड़ा पहले भी होता रहा है. दबी जुबान से अधिकारी व कर्मचारी बताते हैं कि इसमें लिपिक से लेकर वरीय अधिकारियों तक की सेटिंग रहती है.
बिल भुगतान के बाद उनका तय कमीशन पहुंच जाता है. जब भी मामला पकड़ में आता है, तो इसी तरह हाय-तौबा मचता है. बाद में कार्रवाई के नाम पर बीती बात हो जाती है. वर्ष 1996 में सयाल परियोजना के संवेदक द्वारा इसी तरह का एक फरजीवाड़ा किया गया था, जो तत्कालीन बरकाकाना स्थित महाप्रबंधक कार्यालय में पकड़ लियागया था.
अशोक के थे चार बिल
संवेदक अशोक कुमार सिंह का चार फरजी बिल भुगतान के लिए एएफएम कार्यालय पहुंचा था. कुल राशि लगभग पांच लाख है. जबकि चंदा इलेक्ट्रिकल रामगढ़ का एक बिल लगभग 70 हजार है.
वर्मा कंस्ट्रक्शन का भी ऐसा ही बिल पकड़ में आया है. एफएम कार्यालय में भुरकुंडा परियोजना के बिलों को देखने वाला पदस्थापित लिपिक के टेबल पर ही इस बिल को पकड़ा जाना चाहिए था. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. यहां से बिल पास होकर एक अधिकारी के टेबुल से भी पास हो गया. यह वही अधिकारी हैं जो पदोन्नत होकर हाल में ही अरगड्डा चले गये हैं. लेकिन दूसरे अधिकारी ने अपने टेबल पर इसे पकड़ लिया. इससे फरजीवाड़ा में सीसीएल के आंतरिक संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता है.

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