वन की करेंगे रक्षा

जंगल नहीं कटने देंगे, घर की तरह वन की करेंगे रक्षा आदि नारों के बीच सैकड़ों महिलाएं मुरार्मकला जंगल पहुंची़ वृक्षों में रक्षा सूत्र बांधा और इसके बचाने के संकल्प को दुहराया़ यह जंगल झारखंड के सबसे घने सखुआ के जंगल के लिए जाना जाता है़ रामगढ़ : सिरी वृंदावन घन-घन सीरी (सखुआ), साधु के […]

जंगल नहीं कटने देंगे, घर की तरह वन की करेंगे रक्षा आदि नारों के बीच सैकड़ों महिलाएं मुरार्मकला जंगल पहुंची़ वृक्षों में रक्षा सूत्र बांधा और इसके बचाने के संकल्प को दुहराया़ यह जंगल झारखंड के सबसे घने सखुआ के जंगल के लिए जाना जाता है़
रामगढ़ : सिरी वृंदावन घन-घन सीरी (सखुआ), साधु के रूपे रावण सीता के चुराले हो…. आदि गीतों की मधुर धुनों पर मुरार्मकला की महिलाओं ने आठ मार्च को यादगार बना दिया़ यह मौका अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का था जिसे गांव की महिलाओं ने जंगल बचाने के संकल्प के साथ मनाया़
इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि जिला परिषद अध्यक्ष ब्रह्मदेव महतो, विशिष्ट अतिथि रेंजर रामगढ़ एके सिंह मौजूद थे़ अतिथियों ने मुरार्मकला की महिलाओं के साथ जंगल के वृक्षों में रक्षा सूत्र बांधा़ जंगल बचाने के संकल्प को दुहराया़ कार्यक्रम के बाद मुरार्मकला की मुखिया अर्चणा महतो ने ग्रामीणों के बीच चना व गुड़ का वितरण किया़960 एकड़ में फैला है मुरार्मकला का जंगल: जंगल की रक्षा में ग्रामीणों को वन विभाग का साथ मिला है़
जंगल के वर्तमान स्वरूप के संबंध में वनपाल त्रिभुवन ओझा बताते हैं कि 1989 में मुरार्मकला वन समिति का गठन किया गया था़ जिसके पहले अध्यक्ष पूर्व मुखिया स्व गणेश महतो को बनाया गया था़ उस समय इस जंगल का सखुआ पेड़ अंगूठे के रूप में था़ जंगल की रक्षा के लिए लोगों में जागरूकता फैलाया गया़ जंगल से लकड़ी काटने को लेकर गणेश महतो ने अपनी बहु पर 3500 रुपये का जुर्माना लगाया था़ इसके बाद यह संदेश पूरे गांव में फैल गया कि जंगल से लकड़ी काटना अपराध है़ इसके बाद समय के साथ यह जंगल का रूप ले लिया जिसे आज तक ग्रामीणों ने सहेजकर रखा है़ यह जंगल पूरे प्रदेश में जाना जाता है़ जो लगभग 960 एकड़ में फैला हुआ है़ उन्होंने कहा कि वे उस समय से आज तक वनपाल के रूप में यहां सेवा दे रहे हैं. जिसके कारण गांव के लोगों से हमेशा सम्मान मिल रहा है़
मुरार्मकला के जंगल में पार्क बनाया जाये : मुरार्मकला वन समिति के अध्यक्ष चिंतामणी पटेल ने बताया कि पूर्वजों ने इस जंगल की रक्षा कर एक भव्य स्वरूप दिया है़ अब इस जंगल को संवारने के लिए इसके आर्थिक विकास पर भी वन विभाग व सरकार द्वारा पहल होनी चाहिये़ जिससे जंगल बचा रहे और इस समिति का आर्थिक संर्बद्धन हो़ इससे जंगल का और विकास किया जा सके़ वर्तमान स्वरूप वन विभाग व ग्रामीणों के सहयोग से बना हुआ है़ ग्रामीणों की मांग है इसे पार्क का रूप दिया जाना चाहिये़

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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