तीन वर्ष में भी नहीं बना प्रधानाध्यापक कक्ष हाल: राजकीय मध्य विद्यालय बड़गांव का 10 कुजू ए: प्रधानध्यापक कक्ष के लिए बनाये गये पिलरचैनपुर. राजकीय मवि बड़गांव में झारखंड शिक्षा परियोजना द्वारा बनाये जा रहे प्रधानाध्यापक कक्ष तीन वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो पाया. निर्माण काल में सिर्फ पिलर के लिए लोहे के छड़ खड़ा किया गया था. लेकिन उसके बाद यह काम पूरा नहीं हो पाया. वित्तीय वर्ष 2012/13 में विद्यालय में प्रधानाध्यापक कक्ष दो लाख, 43 हजार रुपये की लागत से निर्माण होना था. जिसमें से करीब 91 हजार, 700 रुपये की निकासी भी की जा चुकी है. कक्ष निर्माण के लिए करीब 12 पिलर के लिए छड़ खडा किया गया है. जो कि अब खराब हो रहा हैं. साथ ही भवन निर्माण के लिए लाये गये समान भी खराब होने लगे हैं. बताया जाता है कि विद्यालय कैंपस में जिस जगह पर इसे बनाया जा रहा था इसका ग्रामीणों ने विरोध किया था. साथ ही ग्रामीणों द्वारा निर्माण कार्य में घटिया समान लगाने का भी विरोध किया था. ग्रामीणों के विरोध के बाद प्राचार्य द्वारा कार्य बंद कर दिया गया. क्या कहते हैं पूर्व प्राचार्य: इस संबंध में विद्यालय के पूर्व प्रधानाध्यापक लालचंद साहू ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा विरोध कर इसका काम बंद करा दिया गया था. उनलोगों का कहना था कि यह भवन विद्यालय के मुख्य गेट के पास ही बनाया जा रहा है. इसे संकुल संसाधन केंद्र के पास बनाया जाये. इधर, कनीय अभियंता का कहना है कि संकुल संसाधन केंद्र के बगल में लिपटस का पेड़ है. पहले उसे अनुमति लेकर कटवाया जाये, तब वहां पर भवन को बनाया जाये. क्या कहते हैं पूर्व मुखिया: पंचायत के पूर्व मुखिया बंसती देवी ने बताया कि पूर्व प्राचार्य द्वारा कक्ष को विद्यालय के गेट के पास ही बनाया जा रहा था. जिससे एक तो विद्यालय की सुंदरता खराब हो रही थी. वहीं दूसरी तरफ विद्यालय के जमीन का सदुपयोग नहीं हो रहा था. जबकि संकुल संसाधन केंद्र के बगल में काफी जमीन है. जहां पर उसे बनाया जा सकता है. ग्रामीणों द्वारा आमसभा रखकर भवन को संकुल संसाधन केंद्र के पास बनवाने की बात कही गयी थी.
तीन वर्ष में भी नहीं बना प्रधानाध्यापक कक्ष
तीन वर्ष में भी नहीं बना प्रधानाध्यापक कक्ष हाल: राजकीय मध्य विद्यालय बड़गांव का 10 कुजू ए: प्रधानध्यापक कक्ष के लिए बनाये गये पिलरचैनपुर. राजकीय मवि बड़गांव में झारखंड शिक्षा परियोजना द्वारा बनाये जा रहे प्रधानाध्यापक कक्ष तीन वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो पाया. निर्माण काल में सिर्फ पिलर के लिए लोहे के छड़ […]
