डीएवी बरकाकाना में हंट फोर हंड्रेड सेमिनार का आयोजन
बरकाकाना : डीएवी बरकाकाना में गुरुवार को हंट फोर हंड्रेड सेमिनार का आयोजन किया गया. इसमें मुख्य वक्ता यंगेस्ट साइंटिस्ट ऑफ इंडिया व फाउंडर ऑफ यंग माइंड रिसर्च एंड डेवलपमेंट 19 वर्षीय गोपाल जी अपनी माता उषा देवी के साथ उपस्थित थे. कार्यक्रम का शुभारंभ युवा वैज्ञानिक गोपाल जी, डीएवी क्षेत्रीय जोन निदेशक डॉ उर्मिला सिंह, डीएवी भरेचनगर के प्राचार्य एमके मिश्रा व पतरातू प्राचार्य एसआर प्रसाद ने किया. डॉ सिंह ने बताया कि गोपाल जी 17 वर्ष की उम्र में ही दस नयी खोज कर अपनी पहचान युवा वैज्ञानिक के रूप में बनायी है.
इसरो में मिशन आदित्य का हिस्सा बन कर देश के लिए अपनी सेवा दे रहे हैं. आज गोपाल जी युवाओं के लिए आदर्श के रूप में उभरे हैं. आज के युग में युवा जहां मोबाइल व इंटरनेट में फंस कर स्वीट सिक्सटीन की बात करते हैं, वहीं 19 साल के युवा वैज्ञानिक कीर्तिमान स्थापित कर अपने माता-पिता का नाम रोशन कर रहे हैं.
युवा वैज्ञानिक गोपाल जी ने कहा कि इसरो हमारा स्वाभिमान है. जब तक हम अपने अंदर की अच्छाई, प्रतिभा व उंची सोच के साथ किसी भी लक्ष्य को हासिल करने का जुनून अपने अंदर नहीं जगाते हैं, तब तक सफलता के शिखर तक नहीं पहुंच सकते हैं. स्कूलों में बच्चों का प्रोजेक्ट बनाने के लिए दिये जाते हैं.
बच्चे प्राेजेक्ट बनाते जरूर हैं, पर इंटरनेट के माध्यम से उसे निकाल कर कॉपी पेस्ट कर अपनी जिम्मेदारियों से विमुक्त हो जाते हैं. बच्चे कक्षा में पढ़ाये गये विषयों को भूल जाते हैं, लेकिन फिल्मों व टीवी में बोले गये डायलॉग व डांस हमेशा के लिए याद कर लेते हैं. अभिभावकों के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि माता-पिता अपने बच्चों की काबिलियत से ज्यादा सरकारी नौकरी पाने पर ही विश्वास करते हैं.
17 वर्ष की उम्र में मिली उपलब्धि : गोपाल जी ने खोज व उपलब्धियां पर चर्चा करते हुए बताया कि 17 वर्ष की उम्र में ही बनाना बायो सेल, पेपर बायो सेल, गोपोनियम एलॉय, जी स्टार पावर, हाइड्रोलिक बायो सेल, गोपा-एलास्का, बीएनसी एंड बीएनएफ व लीची वाइन की नयी खोज की.
इसके बाद इंस्पायर अवार्ड गवर्नमेंट ऑफ इंडिया 2016, एमएचआरडी अवार्ड गवर्नमेंट ऑफ इंडिया 2018, बिहार गौरव सम्मान, ब्रेन ऑफ बिहार, राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान व राष्ट्रीय गौरव सम्मान भारत सरकार, ग्लोबल लीडर अवार्ड 2018, मेंटर एंड जज ऑफ स्मार्ट इंडिया हैकाथन 2019, जज ऑफ जवाहरलाल नेहरू नेशनल साइंस 2018-2019 अवार्ड मिला.
