जैन मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज का झारखंड में मंगल प्रवेश, समाज में उत्साह

Praman Sagar Maharaj: जैन मुनि 108 प्रमाण सागर महाराज का झारखंड में मंगल प्रवेश हुआ है, जिससे जैन समाज में उत्साह है. वे 27 मार्च को रांची पहुंचेंगे और समवेद शिखर पारसनाथ जाएंगे. उनके प्रवचन में श्रद्धा, सेवा और साधना पर जोर दिया गया, जबकि उन्हें राज्यकीय अतिथि का दर्जा मिला है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

रांची से राजकुमार लाल की रिपोर्ट

Praman Sagar Maharaj: जैन मुनि श्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज का रविवार को झारखंड में मंगल प्रवेश हुआ. मुनि श्री छत्तीसगढ़ के जशपुर के रास्ते झारखंड के गुमला जिला पहुंचे. लंबे समय से जैन समाज मुनि श्री का झारखंड प्रवास का इंतजार कर रहा था. वह 27 को संभवत: रांची पहुंचेंगे. इसके बाद वह समवेद शिखर पारसनाथ में प्रवास करेंगे. जैन समाज के सैकड़ों लोग मुनि श्री के दर्शन व स्वागत के लिए छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा पहुंचे थे. धर्म ध्वज और जयकारा के साथ मुनि श्री का स्वागत किया. साथ ही मुनि श्री 108 संधानसागर जी महाराज ससंघ का भी झारखंड प्रवेश हुआ.

श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य हैं श्री प्रमाण सागर

मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज संत शिरोमणि श्री विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य हैं. गुणायतन प्रणेता और भावना योग शंका समाधान के जनक हैं. भक्तों के लिए शंका समाधान हर दिन वह अपने परम प्रवचन के माध्यम से करते हैं.

श्रद्धा, समर्पण, सेवा और साधना जीवन का सच्चा मार्ग

भक्तों के बीच पहुंचे मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि जीवन का सच्चा मार्ग श्रद्धा, समर्पण, सेवा और साधना का है. इन्हें केवल शब्दों तक सीमित न रखें, बल्कि अपने जीवन का अभिन्न अंग बनायें. समर्पण को दिखाने की आवश्यकता नहीं होती, वह भीतर से जागृत होना चाहिए. जब हमारी श्रद्धा, समर्पण और साधना देव, गुरु और धर्म के प्रति होती है, तब हृदय में सच्चे भाव स्वतः जागृत होते हैं. वही हमें सही मार्ग पर अग्रसर करते हैं.

जीवन के उत्तरार्ध में साधना को अपनाना जरूरी

मुनि श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि गृहस्थ जीवन के संदर्भ में उन्होंने कहा कि व्यक्ति को सदैव श्रद्धा, सेवा और समर्पण से जुड़ा रहना चाहिए. जीवन के उत्तरार्ध में साधना को अपनाकर अपने जीवन को उच्च दिशा दी जा सकती है. इसी पथ पर वास्तविक उत्कर्ष संभव है. मुनि श्री ने कहा कि यह मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है. न जाने कब यह समाप्त हो जाये. इसका कोई भरोसा नहीं है. इसलिए जब तक जीवन है, उसे सार्थक बनाइए और समय का सदुपयोग कीजिए.

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झारखंड-छत्तीसगढ़ में दुर्लभ संयोग

झारखंड के लिए इसे दोहरी खुशी का अवसर बताते हुए कहा कि एक ओर उनका झारखंड में मंगल प्रवेश हो रहा है, वहीं दूसरी ओर आर्यिका संघ का छत्तीसगढ़ में प्रवेश हो रहा है. ऐसे दुर्लभ अवसर जीवन में बहुत कम मिलते हैं. इस अवसर पर आर्यिका ऋजुमति माता ने कहा कि जब भगवान श्रीराम का विहार होता था, तब वहां नगर बस जाते थे, और आज मुनि श्री के आगमन से वही दिव्य दृश्य प्रतीत हो रहा है. प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि झारखंड सरकार द्वारा मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज को राज्यकीय अतिथि का दर्जा प्रदान किया गया है.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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