रांची से राजकुमार लाल की रिपोर्ट
Chaiti Chhath Puja: झारखंड में चार दिवसीय चैती छठ महापर्व की शुरुआत रविवार को नहाय-खाय के साथ हो गई. इस दिन व्रतियों ने सुबह स्नान-ध्यान कर भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया और व्रत का संकल्प लिया. इसके बाद कद्दू, चावल और दाल से बने शुद्ध भोजन को भगवान को अर्पित कर स्वयं ग्रहण किया गया. प्रसाद के रूप में इसे परिवार और आसपास के लोगों में भी वितरित किया गया.
खरना के साथ शुरू होगा निर्जला व्रत
महापर्व के दूसरे दिन यानी 23 मार्च को खरना का अनुष्ठान किया जाएगा. इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम को स्नान-ध्यान के बाद खीर-रोटी का प्रसाद बनाकर भगवान को अर्पित करते हैं. इसके बाद व्रती स्वयं प्रसाद ग्रहण करते हैं और इसे अपने परिजनों व मित्रों में बांटते हैं. खरना के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है, जो छठ पर्व का सबसे कठिन और महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.
अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य
चैती छठ के तीसरे दिन 24 मार्च को व्रती नदी, तालाब या अन्य जलस्रोतों के किनारे पहुंचकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगे. यह दृश्य बेहद आस्था और भक्ति से भरा होता है. इसके अगले दिन 25 मार्च को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही महापर्व का समापन होगा. इस दौरान हवन और पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की जाएगी.
बाजारों में बढ़ी पूजा सामग्री की मांग
महापर्व को लेकर राजधानी सहित विभिन्न क्षेत्रों के बाजारों में पूजा सामग्री की खरीदारी जोरों पर है. कद्दू, फल, गन्ना और अन्य पूजन सामग्रियों की बिक्री बढ़ गई है. शनिवार को कद्दू का भाव 20 से 30 रुपये प्रति किलो तक रहा. कई लोगों ने अपने घरों में उगाए कद्दू व्रतियों को नि:शुल्क भी उपलब्ध कराए, जो इस पर्व की सामाजिक और धार्मिक भावना को दर्शाता है.
बारिश के कारण खरीदारी पर असर
हालांकि शनिवार शाम हुई बारिश के कारण बाजारों में भीड़ कुछ कम रही. इसके बावजूद व्रती और उनके परिवार के लोग आवश्यक सामग्री की खरीदारी करते नजर आए. लोगों में महापर्व को लेकर उत्साह और श्रद्धा साफ दिखाई दे रही है.
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आस्था, अनुशासन और समर्पण का पर्व
चैती छठ महापर्व आस्था, अनुशासन और समर्पण का प्रतीक है. इसमें व्रती कठिन नियमों का पालन करते हुए भगवान सूर्य की उपासना करते हैं. यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि समाज में एकता, सहयोग और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश भी देता है.
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