नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं परसुडीह कोचाकुल्ही बस्ती के लोग

जमशेदपुर के परसुडीह क्षेत्र में छोटा हनुमान मंदिर से बाघाडेरा, कोचाकुल्ही होते हुए सरजामदा छोलागोड़ा तक की सड़क की हालत अत्यंत दयनीय हो चुकी है. बारिश के मौसम में यह सड़क नाले में बदल जाती है, जिससे आवागमन बेहद कठिन हो जाता है. जर्जर सड़क व नाली की समुचित व्यवस्था नहीं होने की वजह से बस्तीवासी नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं. कोचाकुल्ही के पास सड़क पर बड़े-बड़े बोल्डर उभर आए हैं, जिससे यह चलने योग्य नहीं रह गई है. कोचाकुल्ही नीचे टोला क्षेत्र में बारिश के कारण सड़क का आधा हिस्सा कटकर खाई में तब्दील हो गया है.

जमशेदपुर: जमशेदपुर के परसुडीह क्षेत्र में छोटा हनुमान मंदिर से बाघाडेरा, कोचाकुल्ही होते हुए सरजामदा छोलागोड़ा तक की सड़क की हालत अत्यंत दयनीय हो चुकी है. बारिश के मौसम में यह सड़क नाले में बदल जाती है, जिससे आवागमन बेहद कठिन हो जाता है. जर्जर सड़क व नाली की समुचित व्यवस्था नहीं होने की वजह से बस्तीवासी नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं. कोचाकुल्ही के पास सड़क पर बड़े-बड़े बोल्डर उभर आए हैं, जिससे यह चलने योग्य नहीं रह गई है. कोचाकुल्ही नीचे टोला क्षेत्र में बारिश के कारण सड़क का आधा हिस्सा कटकर खाई में तब्दील हो गया है. यहां से गुजरने वाले लोग हर दिन गिरकर घायल हो रहे हैं. बस्तीवासियों ने इस सड़क के मरम्मतीकरण की मांग को लेकर कई बार मुखिया से लेकर सांसद तक गुहार लगाई है. जिला प्रशासन को भी पत्राचार किया गया है, लेकिन कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है. प्रशासनिक उपेक्षा के कारण सड़क की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है.सड़क की मरम्मत न होने से स्थानीय निवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन अब तक किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया है.

बस्तीवासियों के बोल

जर्जर सड़क की वजह से हम सबों का जीवन नारकीय हो गया है. सांसद, विधायक व जिला प्रशासन को लिखित रूप में समस्या से अवगत करा चुकेे हैं. वे आश्वासन देकर भूल जाते हैं. अविलंब सड़क बने अन्यथा प्रखंड में धरना प्रदर्शन करेंगे.

-भरत सिंह, बस्तीवासी, कोचाकुल्ही

जर्जर सड़क को अविलंब दुरस्त किया जाये. तीन-चार साल से सांसद-विधायक से सड़क मरम्मतीकरण की गुहार लगाकर थक गये हैं. जनप्रतिनिधियों को जनता से कोई लेना देना नहीं रह गया है. सड़क को मरम्मतीकरण की दिशा में अविलंब पहल हो, अन्यथा इसका खामियाजा उन्हें भुगतना होगा.

-संपूर्ण सावैयां, बस्तीवासी कोचाकुल्ही

पंचायत व्यवस्था के बाद भी गांव की ऐसी दुर्दशा समझ से परे है. बस्ती में आने-जाने के लिए एक अदद सड़क तक नहीं है. सड़क पर बड़े-बड़े पत्थर निकल आये हैं. सड़क चलने-फिरने लायक नहीं रह गया है. जनप्रतिनिधियों को जानकारी देने के बाद उनमें तत्परता नहीं है. जिसका खामियाजा बस्तीवासी झेल रहे हैं.

-सीनु होनहागा, बस्तीवासी, कोचाकुल्ही

मुखिया, विधायक, सांसद की अनदेखी का खामियाजा बस्तीवासी झेल रहे हैं. इस सड़क से प्रतिदिन सैकड़ों लोग आते-जाते हैं. जर्जर सड़क की वजह से जनता को काफी परेशानी हो रही है. लेकिन जनप्रतिनिधियों को जनता की परेशानी से कोई लेना देना नहीं रह गया है. इसलिए जनता चार-पांच सालों से परेशानी झेल रहे हैं.

-डिब्रु कोडंकेल, बस्तीवासी, कोचाकुल्ही

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Author: Dashmat Soren

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