सोन-कोयल तट पर किसानों की फसल पर जंगली जानवरों का हमला, बढ़ी परेशानी

नीलगाय व जंगली सूअर कर रहे रबी फसलों को बर्बाद, महिला किसानों पर दोहरी मार

नीलगाय व जंगली सूअर कर रहे रबी फसलों को बर्बाद, महिला किसानों पर दोहरी मार प्रतिनिधि, मोहम्मदगंज प्रखंड के अधौरा, कोइरियाडीह, डीलापर, बीघापर, पंसा और रानीदेवा गांव सोन व कोयल नदी के तटीय इलाके में स्थित है. दोनों नदियों का संगम क्षेत्र किसानों के लिए उपजाऊ भूमि का वरदान माना जाता है. इसी कारण नदी किनारे कई एकड़ भूमि पर किसानों ने रबी फसल लगायी है, लेकिन अब इन फसलों को बचाना किसानों के लिए मुश्किल हो गया है. रात के समय जंगली सूअर और नीलगाय खेतों में घुसकर फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं. इससे किसान आहत और परेशान हैं. कई किसान रात में रखवाली करने के बाद भी फसल नहीं बचा पा रहे हैं. किसानों ने गेहूं, सरसों, मटर, आलू, अरहर, मसूर, चना, फूलगोभी, टमाटर सहित कई प्रकार की फसलें लगायी है, लेकिन नीलगायों का झुंड पलभर में खेत साफ कर देता है, जबकि जंगली सूअर फसल खाने के साथ-साथ जड़ों से उखाड़कर बर्बाद कर देते हैं. महिला किसानों को हो रही अधिक परेशानी सोन व कोयल नदी तटीय इलाके के कई पुरुष रोजगार के लिए बाहर गए हुए हैं. ऐसे में घर की महिलाओं को खेती और गृहस्थी दोनों की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है. सुबह घरेलू काम निबटाकर महिलाएं खेतों में जुट जाती हैं और बुआई से लेकर कटाई तक मेहनत करती हैं. महिला किसान शारदा देवी, अनिता देवी, सीमा देवी, मीना देवी, सरिता देवी, संजू देवी समेत अन्य महिलाओं ने बताया कि पुरुषों के बाहर चले जाने के बाद खेती की पूरी जिम्मेदारी उन पर आ गयी है. कई एकड़ में लगी रबी, दलहन, तेलहन और सब्जी की फसलें जंगली जानवर बर्बाद कर रहे हैं. जितनी लागत और मेहनत खेती में लगती है, उसकी भरपाई नहीं हो पा रही है. जंगली जानवरों के आतंक से किसान बेहद परेशान हैं. नदी की झाड़ियां बनी जानवरों का ठिकाना किसानों ने बताया कि नदी के बीच और किनारे घनी झाड़ियों की भरमार है, जो जंगली सूअर और नीलगायों का सुरक्षित आशियाना बन चुकी है. जंगली सूअरों के भय से लोग उस इलाके में जाने से भी कतराते हैं. किसानों का कहना है कि स्थायी रूप से उगी झाड़ियों को हटाया जाये, तो काफी हद तक जानवरों के आतंक से राहत मिल सकती है. इसको लेकर किसानों ने वन विभाग से पहल करने की मांग की है, ताकि झाड़ियों की सफाई और जंगली जानवरों से बचाव के लिए विभागीय उपाय किए जा सके.

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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