नौशाद अहमद,हुसैनाबाद
सबसे बड़ा असर गर्भवती महिलाओं और थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों पर पड़ रहा
इस बंदी का सबसे बड़ा असर गर्भवती महिलाओं और थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों पर पड़ रहा है. प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव की स्थिति में महिलाओं को तत्काल रक्त की आवश्यकता होती है, लेकिन अस्पताल में एक यूनिट रक्त भी उपलब्ध नहीं है. मजबूर परिजनों को मरीजों की जान बचाने के लिए मेदिनीनगर, रांची, डेहरी (बिहार) या वाराणसी (उत्तर प्रदेश) तक दौड़ लगानी पड़ती है. कई बार लंबी दूरी और समय की कमी के कारण मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं या उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक हो जाती है.यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को उजागर करती है. अस्पताल प्रबंधन ने दो बार उच्च स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेजकर रिन्यूअल और नए उपकरणों की मांग की है-पहली बार आठ दिसंबर 2023 को और दूसरी बार 5 मई 2026 को. पत्रों में न केवल रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण की मांग की गयी है, बल्कि नये फ्रीजर और तकनीकी उपकरणों की भी आवश्यकता बतायी गयी है. इसके बावजूद मुख्यालय स्तर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
आंदोलन की चेतावनी
स्थानीय नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. बसपा नेता शेर अली और नगर पंचायत अध्यक्ष अजय भारती ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य बजट में करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन हुसैनाबाद जैसे महत्वपूर्ण अनुमंडल में एक ब्लड स्टोरेज यूनिट का नवीनीकरण न होना प्रशासनिक तंत्र की घोर विफलता है. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही सुविधा बहाल नहीं की गई तो जनता आंदोलन के लिए बाध्य होगी.कोट…अस्पताल प्रबंधन लगातार प्रयासरत है, लेकिन रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल के अभाव में यूनिट बंद है. उन्होंने आश्वासन दिया कि जैसे ही उच्च विभाग से अनुमति और उपकरण उपलब्ध होंगे, यूनिट को नये सिरे से चालू किया जायेगा.
स्वास्थ्य उपाधीक्षक डॉ. संजय कुमार रवि
