मोहम्मदगंज (पलामू): पहाड़ को चीरती हुई ट्रेन जैसे ही सुरंग में प्रवेश करती है और कुछ ही पल बाद ऊंची पहाड़ियों के बीच कोयल नदी की जलधारा के किनारे निकलती है, तो यह नजारा यात्रियों के लिए किसी रोमांचक सफर से कम नहीं होता. पलामू के मोहम्मदगंज में एक ही पहाड़ पर एक ही स्थान पर बनी तीन रेल सुरंगें इस इलाके की खास पहचान हैं. प्राकृतिक खूबसूरती और इंजीनियरिंग के इस अनोखे मेल को देखने के लिए यहां आने वाले सैलानी भी आकर्षित होते हैं.
कनीकी कला और इंजीनियरिंग का अनोखा उदाहरण
झारखंड की सीमा में रेल मार्ग के प्रवेश द्वार के रूप में भी मोहम्मदगंज की पहचान बनी हुई है. पूर्व मध्य रेलवे के सोननगर से मेदिनीनगर होते हुए रांची जाने वाले रेल मार्ग पर बोगदा पहाड़ को चीरकर तीन रेल सुरंगों का निर्माण किया गया है. अलग-अलग समय में बनी ये तीनों सुरंगें तकनीकी कला और इंजीनियरिंग का अनोखा उदाहरण हैं.
हाल में तीसरी रेल पटरी के लिए बनाई गई सुरंग के द्वार को भी आकर्षक रूप दिया गया है. यहां झारखंड की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाली पेंटिंग उकेरी गई हैं. सुरंग के प्रवेश द्वार पर पत्थरों पर जंगली जानवरों समेत अन्य आकृतियां बनाई गई हैं, जो इस जगह की खूबसूरती को और बढ़ाती हैं. बोगदा पहाड़ में एक ही स्थान पर तीन रेल सुरंगें होने के कारण यह जगह स्थानीय लोगों और सैलानियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बन गई है. इसी पहाड़ से सटे क्षेत्र में पर्यटन स्थल भीम चूल्हा और भीम बराज भी स्थित हैं. यहां आने वाले पर्यटक रेल सुरंगों के साथ पहाड़ और कोयल नदी की प्राकृतिक सुंदरता का भी आनंद लेते हैं.
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सुरंग के ऊपर से दिखता है मनमोहक नजारा
सुरंग के अंदर पैदल जाना जोखिम भरा होता है. ऐसे में पर्यटक पहाड़ पर चढ़कर सुरंगों और आसपास के प्राकृतिक नजारे को देखते हैं. पहाड़, रेल सुरंग और कोयल नदी की जलधारा का एक साथ दिखाई देना लोगों को खास अनुभव देता है. एक ही स्थान पर बनी तीनों सुरंगों को देखना और ट्रेन में बैठकर इनके भीतर से गुजरना यात्रियों के लिए रोमांचकारी अनुभव होता है. सुरंग पार करने के बाद एक ओर ऊंचे पहाड़ और दूसरी ओर कोयल नदी की जलधारा दिखाई देती है. पहाड़ के बीच से सुरंग से सरपट निकलती ट्रेन का नजारा भी लोगों को आकर्षित करता है. रेल कर्मियों के अनुसार तीनों सुरंगों की लंबाई करीब 90 से 100 मीटर तक है. ये सुरंगें घुमावदार हैं, जिसके कारण ट्रेन के अंदर से गुजरते समय यात्रियों को अलग तरह का रोमांच महसूस होता है.
एक ही पहाड़ पर तीन सुरंगों के मामले में देश में तीसरे स्थान का दावा
डिजिटल पड़ताल के अनुसार, एक ही पहाड़ को चीरकर एक ही स्थान पर तीन रेल सुरंगों के निर्माण के मामले में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा-नागपुर सेक्शन और महाराष्ट्र के कोंकण रेलवे के खंडाला घाट-करबुड़े के बाद मोहम्मदगंज का स्थान बताया जाता है. मध्य प्रदेश में बनी सुरंग को सबसे बड़ा बताया गया है. महाराष्ट्र के बाद झारखंड के मोहम्मदगंज में एक ही पहाड़ पर बनी ये तीन रेल सुरंगें तीसरे स्थान पर होने का दावा किया जाता है. मोहम्मदगंज के ग्रामीण इन रेल सुरंगों को झारखंड में प्रवेश करने वाले रेल मार्ग का प्रवेश द्वार बताते हैं. बिहार की सीमा से करीब 24 किलोमीटर दूर भीम चूल्हा और भीम बराज के समीप से यह रेल मार्ग गुजरता है. इसी मार्ग पर बोगदा पहाड़ में बनी तीनों रेल सुरंगें अब मोहम्मदगंज की खास पहचान बन चुकी हैं.
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